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11 अक्टूबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्रि

शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नौ दिनों के पावन पर्व, जानिए तिथियां और घटस्थापना मुहूर्त

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 से आरंभ हो रहे हैं, जिसके पहले दिन विधि-विधान के साथ घटस्थापना की जाएगी और भक्त मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की उपासना करेंगे।

शारदीय नवरात्रि 2026 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नौ दिनों के पावन पर्व जानिए तिथियां और घटस्थापना मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि 2026: |

नई दिल्ली। नवरात्रि के प्रत्येक दिन पूजा का एक ही सार्वभौमिक घड़ी वाला मुहूर्त नहीं होता। पूजा का उचित समय स्थान, सूर्योदय और उस दिन की तिथि के अनुसार बदल सकता है। इसलिए सामान्य घरेलू पूजा के लिए स्नान के बाद सुबह के समय, तिथि के प्रभावी रहने के दौरान पूजा करना उचित माना जाता है।

दिल्ली में सूर्योदय लगभग सुबह 6:20–6:23 बजे के आसपास

11 अक्टूबर को दिल्ली में सूर्योदय लगभग सुबह 6:20–6:23 बजे के आसपास रहेगा। इसलिए सामान्य नवरात्रि पूजा सुबह स्नान के बाद की जा सकती है। विशेष अनुष्ठान जैसे घटस्थापना, संधि पूजा और नवमी हवन के लिए संबंधित दिन का स्थानीय मुहूर्त देखना चाहिए।

दिनवार पूजा का संक्षिप्त समय

देवी                  प्रमुख पूजा                  पूजा का समय

मां शैलपुत्री          घटस्थापना                  प्रतिपदा तिथि में
मां ब्रह्मचारिणी      दैनिक पूजा                 द्वितिया तिथि में
मां चंद्रघंटा          दैनिक पूजा                 तृतीया तिथि में
मां कूष्मांडा         दैनिक पूजा                 चतुर्थी तिथि में
मां स्कंदमाता       दैनिक पूजा                 पंचमी तिथि में
मां कात्यायनी       दैनिक पूजा                 षष्टी तिथि में
मां कालरात्रि        महासप्तमी पूजा           सप्तमी तिथि में
मां महागौरी         महाष्टमी पूजा              अष्टमी तिथि में
मां सिद्धिदात्री      महानवमी/हवन           नवमी तिथि में; हवन 10:51 AM के बाद

स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर होना संभव है। अतः पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग में मुहूर्त अवश्य देख लें।

नवरात्रि में कौन-कौन से नियम रखें?

नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार व्रत रखते हैं। कोई फलाहार करता है तो कोई एक समय सात्विक भोजन करता है। व्रत के नियम परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकते हैं।

पूजा के दौरान—

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थान की साफ-सफाई रखें।
  • मां दुर्गा को फूल, अक्षत, रोली, चंदन और फल अर्पित करें।
  • प्रतिदिन देवी के संबंधित स्वरूप का ध्यान करें।
  • दुर्गा सप्तशती, देवी कवच या अन्य स्तुति का पाठ अपनी परंपरा के अनुसार करें।
  • सुबह और शाम आरती करें।
  • भोग लगाने के बाद प्रसाद बांटें।
  • व्रत रखने वाले लोग अपनी स्वास्थ्य क्षमता के अनुसार भोजन करें।

कन्या पूजन का क्या है महत्व?

अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। इसमें छोटी कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में सम्मान देकर उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और भोजन कराया जाता है। कई परिवारों में कन्याओं के साथ एक बालक को भी भैरव स्वरूप मानकर पूजा की जाती है।

दशहरे के साथ होगा नवरात्रि का समापन

नवरात्रि के बाद 21 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। कई स्थानों पर इसी दिन देवी प्रतिमा का विसर्जन और शस्त्र पूजा जैसे आयोजन भी किए जाते हैं।

धार्मिक मान्यता और परंपरा

शारदीय नवरात्रि को शक्ति उपासना का पर्व माना जाता है। नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा के माध्यम से भक्त शक्ति, ज्ञान, धैर्य, साहस और समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के नौ भोगों की सूची—घी, चीनी, खीर, मालपुआ, केला, शहद, गुड़, नारियल और तिल उत्तर भारतीय परंपरा में व्यापक रूप से प्रचलित है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में देवी को अलग भोग चढ़ाने की परंपरा हो सकती है।

नोट: पूजा और मुहूर्त के समय शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। ऊपर दिए गए मुख्य समय नई दिल्ली के पंचांग के आधार पर हैं। विभिन्न स्थानों के श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार घटस्थापना, अष्टमी, नवमी और हवन का समय निर्धारित करें।

(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)

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