आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाएगी।
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवतः 2083
मासः आश्विन
ऋतुः शरद ऋतु
पक्षः शुक्ल पक्ष
तिथिः षष्ठी — 17 अक्टूबर की सुबह करीब 5:54 बजे तक, इसके बाद सप्तमी
नक्षत्रः ज्येष्ठा — सुबह करीब 6:47 बजे तक, इसके बाद मूल
योगः शोभन — रात करीब 10:06 बजे तक, इसके बाद अतिगंड
करणः कौलव — शाम करीब 4:38 बजे तक, इसके बाद तैतिल
वारः शुक्रवार
चंद्र राशिः वृश्चिक — सुबह करीब 6:47 बजे तक, इसके बाद धनु
सूर्य राशिः कन्या
अयनः दक्षिणायन
सूर्योदयः सुबह करीब 6:22 बजे
सूर्यास्तः शाम करीब 5:51 बजे
चंद्रोदयः सुबह करीब 11:39 बजे
चंद्रास्तः रात करीब 9:36 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
चर सामान्य सुबह 6:22 से 7:48 बजे तक
लाभ उन्नति सुबह 7:48 से 9:14 बजे तक
अमृत सर्वोत्तम सुबह 9:14 से 10:40 बजे तक
काल हानि सुबह 10:40 से दोपहर 12:06 बजे तक
शुभ उत्तम दोपहर 12:06 से 1:32 बजे तक
रोग अमंगल दोपहर 1:32 से 2:58 बजे तक
उद्वेग अशुभ दोपहर 2:58 से 4:24 बजे तक
चर सामान्य शाम 4:24 से 5:51 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
काल हानि शाम 5:51 से 7:25 बजे तक
लाभ उन्नति रात 7:25 से 8:59 बजे तक
उद्वेग अशुभ रात 8:59 से 10:33 बजे तक
शुभ उत्तम रात 10:33 से 12:07 बजे तक
अमृत सर्वोत्तम रात 12:07 से 1:41 बजे तक
चर सामान्य रात 1:41 से 3:15 बजे तक
रोग अमंगल रात 3:15 से 4:49 बजे तक
काल हानि सुबह 4:49 से 6:22 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
मुहूर्त समय
ब्रह्म मुहूर्त सुबह करीब 4:45 से 5:36 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त सुबह करीब 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक
विजय मुहूर्त दोपहर करीब 2:00 से 2:45 बजे तक
गोधूलि बेला शाम करीब 5:51 से 6:16 बजे तक
राहुकाल सुबह 10:40 से दोपहर 12:06 बजे तक
यमगंड दोपहर 2:59 से शाम 4:25 बजे तक
गुलिक काल सुबह 7:48 से 9:14 बजे तक
दिशा शूल शुक्रवार को दिशा शूल पश्चिम दिशा में माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, इस दिशा में लंबी यात्रा करने से पहले अपनी परंपरा अनुसार उपाय करें।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कन्या
चंद्रमा वृश्चिक से धनु
मंगल कर्क
बुध तुला
गुरु कर्क
शुक्र तुला
शनि मीन
राहु कुंभ
केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
शारदीय नवरात्रि का छठा दिनः आज शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कात्यायनी साहस, शक्ति और धर्म की रक्षा का प्रतीक हैं। भक्त उनसे परिवार की सुख-समृद्धि, बाधाओं से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
मां कात्यायनी का स्वरूप और पूजाः मां कात्यायनी को देवी दुर्गा का शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा। देवी की पूजा में लाल या पीले पुष्प, अक्षत, चंदन, फल और अपनी परंपरा के अनुसार भोग अर्पित किया जा सकता है। पूजा करते समय मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- देवी को पुष्प, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करें।
- अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भोग लगाएं।
- मां कात्यायनी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- दुर्गा चालीसा या देवी स्तुति का पाठ कर सकते हैं।
- आरती के बाद परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
- व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत के नियमों का पालन करें।
- जरूरतमंदों की सहायता करें और दिनभर संयमित वाणी तथा सकारात्मक व्यवहार बनाए रखें।
Disclaimer: PrimeNews इस लेख में दी गई पंचांग संबंधी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह उपलब्ध पंचांग गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया और मुहूर्त में स्थान तथा गणना-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण पूजा, व्रत या शुभ कार्य से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।
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