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घर के मंदिर के लिए जरूरी वास्तु टिप्स

घर के मंदिर के लिए वास्तु नियम: इन बातों का रखें ध्यान, मिलेगा निरंतर शुभ आशीर्वाद

घर में बना पूजा घर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक सुकून का केंद्र होता है।

घर के मंदिर के लिए वास्तु नियम इन बातों का रखें ध्यान मिलेगा निरंतर शुभ आशीर्वाद

Vastu Tips for Home Temple |

घर में मंदिर: वास्तु से बढ़ाएं सुख-शांति

घर में बना पूजा घर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक सुकून का केंद्र होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार मंदिर में कुछ नियमों का पालन करके घर में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक वातावरण को मजबूत किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि घर के मंदिर में किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

मूर्तियों की सही ऊंचाई

वास्तु के अनुसार मंदिर में रखी जाने वाली मूर्तियों की ऊंचाई बहुत मायने रखती है।

  • यदि मंदिर छोटा है तो 3 से 6 इंच की मूर्तियां रखें।
  • मध्यम आकार के मंदिर में 12 से 18 इंच की मूर्तियां उपयुक्त होती हैं।
  • बहुत बड़े मंदिर में भी कोशिश करें कि 24 इंच से अधिक ऊंची मूर्तियां न रखें।

संतुलित ऊंचाई वाली मूर्तियां घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखती हैं।

शिवलिंग का उचित आकार

घर में शिवलिंग स्थापित करते समय उसके आकार का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है। वास्तु के अनुसार अंगूठे के आकार का शिवलिंग ही घर पर रखने के लिए शुभ माना जाता है। बहुत बड़ा शिवलिंग घर की ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है और नकारात्मकता बढ़ा सकता है।

मूर्ति स्थापना की सही दिशा

वास्तु शास्त्र के मुताबिक पूजा घर में मूर्ति स्थापना उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, में करनी चाहिए। यह दिशा देवताओं की दिशा मानी जाती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र होती है।

टूटी मूर्तियां न रखें

पूजाघर में टूटी या खंडित मूर्तियों की स्थापना कभी नहीं करनी चाहिए। अगर किसी मूर्ति में दरार आ जाए या वह टूट जाए, तो उसे तुरंत हटा दें। खंडित मूर्तियां घर की सकारात्मक ऊर्जा को कम करती हैं।

मूर्तियों को दीवार से न सटाएं

मूर्तियों को हमेशा मंदिर की दीवार से थोड़ा दूर रखें। दीवार से सटी मूर्तियां ऊर्जा प्रवाह को रोकती हैं और पूजा का प्रभाव कम कर सकती हैं।

नग्न या बिना वस्त्रों वाली मूर्तियों से बचें

पूजाघर में हमेशा वस्त्र पहनी हुई और शुभ रूप वाली मूर्तियां ही रखें। नग्न मूर्तियां वास्तु के अनुसार शुभ नहीं मानी जातीं।

जमीन पर बैठकर पूजा न करें

पूजा करते समय हमेशा आसन का प्रयोग करें। कुशासन, चटाई या किसी भी पवित्र आसन पर बैठना शुभ माना जाता है। जमीन पर सीधे बैठकर पूजा करना वास्तुसम्मत नहीं है।

शयनकक्ष में मंदिर न बनाएं

अगर मजबूरी में बेडरूम में पूजा घर बनाना पड़े, तो इसे उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखें। साथ ही रात में मंदिर को पर्दे से ढंक देना चाहिए।

 

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