पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रजापति दक्ष की 13 पुत्रियों का विवाह महर्षि कश्यप से हुआ था, जिनसे देवता, दैत्य, दानव, नाग, गरुड़, पशु-पक्षी, वनस्पतियां और अन्य दिव्य वंशों की उत्पत्ति मानी जाती है।
नई दिल्ली (भारत)। सनातन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मांड में समस्त जीवों, देवी-देवताओं और प्राकृतिक तत्वों का उद्गम एक ही विशाल वंशवृक्ष से हुआ है। यह वंशवृक्ष प्रजापति दक्ष की 13 पुत्रियों और महर्षि कश्यप के दिव्य विवाह से निर्मित हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार, सृष्टि निर्माण के समय जब महर्षि कश्यप ने अपनी पत्नियों को संतान प्राप्ति का वरदान दिया, तो सभी ने अपनी-अपनी इच्छानुसार कुल और वंश मांगे, जिससे संपूर्ण सृष्टि का ताना-बाना तैयार हुआ।
प्रजापति दक्ष की 13 पुत्रियों का विवाह महर्षि कश्यप से
पौराणिक कथा के अनुसार प्रजापति दक्ष की 13 पुत्रियों का विवाह महर्षि कश्यप से हुआ था। कद्रू और विनता भी उन्ही पत्नियों मे थीं। जब सृष्टि के निर्माण का समय आया, तो महर्षि कश्यप ने अपनी सभी पत्नियों को संतान का वरदान मांगने को कहा। सभी ने अपनी-अपनी इच्छानुसार संतान का वरदान मांगा। जिससे आगे चलकर सृष्टि के विभिन्न वंशों की उत्पत्ति हुई।
महर्षि कश्यप की सभी 13 पत्नियों से उत्पन्न संतानों और उनके पूरे वंश का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
1. अदिति (Aditi): देवता।
प्रमुख नाम: इन्द्र, धाता, मित्र, अर्यमा, वरुण, अंशु, भग, विवस्वान (सूर्य), पूषा, त्वष्टा, सविता और वामन।
नोट: इन्ही के पोते और उनकी पत्नी से ही मनुष्यों की उत्पत्ति मानी जाती है।
2. दिति (Diti): दैत्य और मरुद्गण।
प्रमुख नाम: हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु। बाद में इन्द्र के वज्र से इनके गर्भ के 49 टुकड़े हुए, जो मरुद्गण बने।
3. दनु (Danu): दानव।
प्रमुख नाम: विप्रचित्ति, शम्बर, नमुचि, पुलोमा, द्विमूर्धा और केशी। इन्हीं के वंश में आगे चलकर राहु, महिषासुर और वृत्रासुर पैदा हुए।
4. कद्रू (Kadru): 1,000 नाग (सर्प)।
प्रमुख नाम: शेषनाग, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, ऐरावत और कालिया नाग।
5. विनता (Vinata): दो प्रतापी पुत्र।
नाम: अरुण (सूर्य देव के सारथी) और गरुड़ (पक्षियों के राजा और भगवान विष्णु के वाहन)।
6. सुरसा (Surasa): यातुधान (राक्षस) और कुछ विषैले सर्प।
7. सुरभी (Surabhi): चौपाया पशु।
कामधेनु (दिव्य गाय), बैल, भैंस और अन्य खुर वाले दुधारू पशुओं की उत्पत्ति हुई।
8. ताम्रा (Tamra): शिकारी पक्षी और जानवर।
इनकी छह पुत्रियों (काकी, श्येनी, भासी, धृतराष्ट्री, शुकी, सुग्रीवी) से कौवे, बाज, गिद्ध, हंस, तोते, घोड़े, ऊंट और गधे उत्पन्न हुए।
9. क्रोधावशा (Krodhavasha): हिंसक जीव।
इनसे तीखे दांतों वाले मांसाहारी पशु (जैसे शेर, बाघ, भेड़िए, तेंदुए) और भूत-प्रेत उत्पन्न हुए।
10. इरा (Ira): वनस्पति जगत।
इनसे पृथ्वी के समस्त वृक्ष, लताएं, झाड़ियां, औषधियां और घास पैदा हुईं।
11. मुनि (Muni): अप्सराएं।
स्वर्ग की प्रसिद्ध अप्सराएं (जैसे रम्भा, उर्वशी, मिश्रकेशी) इन्हीं की संतानें हैं।
12. अरिष्टा (Arishta): गंधर्व और किन्नर।
विवरण: स्वर्ग के दिव्य संगीतकार और गायक (जैसे हाहा, हूहू, चित्ररथ) इन्हीं के वंशज हैं।
13. विश्वा (Vishva): विश्वेदेव।
इनसे 'विश्वेदेव' नामक देवताओं के एक विशेष और पवित्र समूह की उत्पत्ति हुई, जिनका आह्वान श्राद्ध कर्मों में किया जाता है।
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