आज श्रावण मास के शुक्ल-पक्ष की पंचमी पर पूरे देश में नाग-पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है।
नई दिल्ली (भारत)। सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला नागपंचमी पर्व हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन नाग देवताओं की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नागों की पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। नागपंचमी का संबंध भगवान शिव, नागराज वासुकि, तक्षक और भगवान कृष्ण से जुड़ी कई पौराणिक कथाओं से भी माना जाता है।
नागपंचमी क्यों मनाई जाती है?
हिंदू धर्म में नागों को केवल सर्प के रूप में नहीं, बल्कि नाग देवता के रूप में पूजनीय माना गया है। भगवान शिव के गले में नागराज वासुकि के विराजमान होने के कारण नागों का शिव से विशेष संबंध माना जाता है।
नागपंचमी के दिन नाग देवताओं की पूजा कर उनसे परिवार की रक्षा, सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। बारिश के मौसम में सांपों के बिलों से बाहर आने की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में इस पर्व को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना से जोड़कर भी देखा जाता है।
नागपंचमी की शुरुआत कब हुई?
नागपंचमी की शुरुआत की कोई निश्चित ऐतिहासिक तारीख या वर्ष उपलब्ध नहीं है। यह पर्व अत्यंत प्राचीन भारतीय धार्मिक परंपराओं से जुड़ा माना जाता है। नाग पूजा की परंपरा का उल्लेख प्राचीन हिंदू धार्मिक साहित्य और महाभारत जैसे ग्रंथों में मिलता है।
महाभारत में राजा परीक्षित, उनके पुत्र जनमेजय और नागराज तक्षक से जुड़ी कथा आती है। जनमेजय ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए नाग यज्ञ कराया था। बाद में आस्तिक ऋषि के हस्तक्षेप से यह यज्ञ रोका गया। नागों की रक्षा से जुड़ी इस कथा को भी नाग पूजा की परंपरा से जोड़ा जाता है।
नागपंचमी पर क्या किया जाता है?
इस दिन श्रद्धालु नाग देवता की प्रतिमा या चित्र की पूजा करते हैं। कई स्थानों पर भगवान शिव और नाग देवता की विशेष पूजा की जाती है। दूध, फूल, अक्षत और जल आदि अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है।
आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश
नागपंचमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच संबंध को दर्शाने वाली परंपरा भी है। सांप पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और चूहों जैसे जीवों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसलिए इस पर्व पर नागों की पूजा के साथ उनके संरक्षण और उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार का संदेश भी महत्वपूर्ण है।
नागपंचमी की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसकी जड़ें प्राचीन धार्मिक मान्यताओं में हैं, जबकि इसका संदेश आज भी प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा हुआ है।
यह भी पढ़ेंः 17 अगस्त 2026 (सोमवार) को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और चित्रा नक्षत्र का संयोग