प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

पुत्रदा एकादशी का महत्व और पूजा विधि

पुत्रदा एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है? जानिए पूजा विधि, महत्व और भगवान विष्णु की पौराणिक कथा

धार्मिक मान्यता के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना, संतान के कल्याण और परिवार की सुख-शांति की कामना के लिए रखा जाता है।

पुत्रदा एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है जानिए पूजा विधि महत्व और भगवान विष्णु की पौराणिक कथा

Putrada Ekadashi Vrat | AI Image

नई दिल्ली (भारत)। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। साल में आने वाली 24 एकादशियों में पुत्रदा एकादशी को भी महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से संतान सुख, संतान की कुशलता और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है। साल में दो पुत्रदा एकादशी आती हैं—एक पौष मास के शुक्ल पक्ष में और दूसरी सावन मास के शुक्ल पक्ष में।

पुत्रदा एकादशी का महत्व

‘पुत्रदा’ का अर्थ है संतान प्रदान करने वाली। धार्मिक मान्यता के अनुसार संतान की इच्छा रखने वाले दंपती इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। वहीं जिन लोगों की संतान है, वे उनके अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुखी जीवन की कामना से भी यह व्रत रखते हैं। यह व्रत केवल पुत्र प्राप्ति तक सीमित नहीं माना जाता। इसे संतान के कल्याण और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से जोड़ा जा सकता है।

पुत्रदा एकादशी व्रत की पूजा विधि

एकादशी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, फल, तुलसी दल और पीले वस्त्र अर्पित किए जा सकते हैं।

इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। दिनभर श्रद्धानुसार उपवास रखें और रात में भगवान का स्मरण करें। अगले दिन द्वादशी तिथि में उचित विधि से व्रत का पारण किया जाता है।

एकादशी व्रत में अन्न का सेवन न करने की परंपरा है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या या चिकित्सकीय प्रतिबंध होने पर कठोर उपवास करने के बजाय अपनी स्थिति के अनुसार आहार लेना उचित है।

पुत्रदा एकादशी की पौराणिक कथा

पद्म पुराण में वर्णित एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार भद्रावती नगरी में सुकेतुमान नाम के राजा रहते थे। उनकी पत्नी का नाम शैव्या था। राजा के पास धन-दौलत और राज्य की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा और रानी बहुत चिंतित रहते थे।

एक दिन राजा सुकेतुमान दुखी होकर वन की ओर चले गए। वहां उन्हें कुछ ऋषि-मुनि मिले। राजा ने उन्हें अपनी परेशानी बताई। ऋषियों ने उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की आराधना करने की सलाह दी।

राजा ने ऋषियों के बताए अनुसार श्रद्धापूर्वक पुत्रदा एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की पूजा की। धार्मिक कथा के अनुसार उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। इसके बाद राजा के घर पुत्र का जन्म हुआ और परिवार में खुशियां लौट आईं।

व्रत से जुड़ा संदेश

पुत्रदा एकादशी की कथा में भगवान विष्णु की भक्ति, संयम और श्रद्धा का महत्व बताया गया है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु से संतान के कल्याण, परिवार की सुख-शांति और जीवन में सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं।

(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)

यह भी पढ़ेंः बार-बार लौट रहा है बुखार तो न करें नजरअंदाज, जानिए कब जरूरी है डॉक्टर से सलाह
 

Related to this topic: