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5500 साल पुराना प्लेग, अध्ययन में खुलासा

5,500 साल पहले भी कहर बरपा रहा था प्लेग! प्राचीन डीएनए अध्ययन में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में गिने जाने वाले प्लेग को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बड़ा खुलासा किया है। नए शोध से पता चला है कि यह बीमारी कम से कम 5,500 साल पहले भी इंसानी आबादी पर गंभीर असर डाल रही थी।

5500 साल पहले भी कहर बरपा रहा था प्लेग प्राचीन डीएनए अध्ययन में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Ancient DNA shows 5500-year-old plague |

प्राचीन डीएनए से हुआ बड़ा खुलासा

वैज्ञानिकों ने प्लेग के इतिहास से जुड़ा एक बड़ा रहस्य सुलझाने का दावा किया है। दक्षिण-पूर्वी साइबेरिया के प्राचीन कब्रिस्तानों से मिले डीएनए नमूनों में प्लेग के ऐसे अज्ञात प्रकारों की पहचान हुई है, जिन्होंने करीब 5,500 साल पहले लोगों की जान ली थी। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह मनुष्यों में प्लेग के सबसे पुराने ज्ञात प्रमाण हो सकते हैं।

ब्लैक डेथ से भी हजारों साल पुराना संक्रमण

प्लेग येरसिनिया पेस्टिस नामक बैक्टीरिया से फैलता है। इसी बीमारी ने 14वीं शताब्दी में 'ब्लैक डेथ' जैसी विनाशकारी महामारी को जन्म दिया था, जिसमें करोड़ों लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले वैज्ञानिक प्लेग के सबसे पुराने ज्ञात प्रकार को लगभग 3,800 साल पुराना मानते थे, लेकिन नई खोज ने इस समयरेखा को और पीछे धकेल दिया है।

बच्चों और किशोरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर

शोध के दौरान बैकाल झील क्षेत्र के कब्रिस्तानों में बड़ी संख्या में बच्चों और किशोरों के अवशेष मिले। इनमें चोट या किसी अन्य कारण से मौत के संकेत नहीं थे। डीएनए विश्लेषण में 46 लोगों में से 18 के शरीर में प्लेग बैक्टीरिया के प्रमाण मिले। वैज्ञानिकों को एक ऐसा आनुवंशिक तत्व भी मिला, जो संक्रमण को अधिक गंभीर बना सकता था। माना जा रहा है कि इसी वजह से बीमारी का असर खासतौर पर बच्चों पर ज्यादा पड़ा।

कम समय में हुई थीं कई मौतें

रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला कि कई मौतें बहुत कम समय के भीतर हुई थीं। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह किसी बड़े प्रकोप का संकेत है। कुछ परिवारों के सदस्य एक साथ दफन पाए गए, जिससे संभावना जताई गई कि संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैला होगा।

मार्मोट हो सकते हैं बीमारी के स्रोत

अध्ययन में यह भी संकेत मिला कि संक्रमण संभवतः मार्मोट नामक बड़े कृंतकों के जरिए इंसानों तक पहुंचा था। ये जानवर लंबे समय से प्लेग बैक्टीरिया के प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, उस समय लोग मांस और फर के लिए मार्मोट का शिकार करते थे। शिकार के दौरान बैक्टीरिया इंसानों के संपर्क में आया होगा। कब्रों में मार्मोट के दांतों से बने आभूषण भी मिले हैं, जो इंसानों और इन जानवरों के बीच करीबी संबंध की ओर इशारा करते हैं।

प्लेग की उत्पत्ति पर नई बहस

वैज्ञानिकों का मानना है कि प्लेग की शुरुआत मध्य या उत्तर-पूर्वी एशिया में हुई होगी और बाद में यह पूरे यूरेशिया में फैल गया। यह सब उस दौर में हुआ, जब न बड़े शहर थे और न ही घनी आबादी, जिन्हें आमतौर पर महामारियों के प्रसार का कारण माना जाता है।

अब भी बने हुए हैं कई रहस्य

हालांकि इस अध्ययन ने प्लेग के इतिहास पर नई रोशनी डाली है, लेकिन कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह बीमारी इतनी तेजी से कैसे फैली और इसमें जानवरों तथा मानव-से-मानव संक्रमण की कितनी भूमिका थी।

भविष्य की महामारियों को समझने में मिलेगी मदद

विशेषज्ञों का कहना है कि प्लेग के शुरुआती स्वरूप और उसके फैलाव को समझना आधुनिक विज्ञान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे यह जानने में मदद मिलेगी कि रोगजनक समय के साथ कैसे विकसित होते हैं और भविष्य में फैलने वाली महामारियों से कैसे निपटा जा सकता है।

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