प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

बन सकती हैं कैंसर, डायबिटीज, त्वचा रोगों की दवाएं

हिमाचल में बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने खोजी रसबेरी की नई प्रजाति

यह समुद्र तल से लगभग 3200 फुट से 7200 फुट तक की ऊंचाई पर मिलती है। मौसम के अनुकूलन के साथ इसके पौधे जंगलों,घाटियों और सड़कों के किनारे भी पाए जाते है।

हिमाचल में बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने खोजी रसबेरी की नई प्रजाति

हिमाचल में मिली रसबेरी की नई प्रजाति |

शिमला (हिमाचल) । बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) के शोधकर्ताओं ने हिमाचल प्रदेश में जंगली रसबेरी (Rubus / 'हिसलू' या 'आँछू') की एक नई प्रजाति की खोज की है।  शोध करने वालों ने बताया कि यह वैज्ञानिक और पर्यावरण महत्व से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण खोज है। भविष्य में इसके व्यावासायिक उत्पादन की भी बड़ी संभावनाएं हैं। शोध के बाद इसकी व्यावसायिक खेती पर भी जोर दिया जाएगा। 

इस खोज की खासियत

यह खोज पश्चिमी हिमालय की जैव विविधता को दर्शाती है। हिमालय का पश्चिमी इलाका अभी कई अज्ञात और औषधीय गुणों वाली वनस्पतियों और और दुर्लभ पौधों का बड़ा भंडार है। इस रसबेरी की लगभग सभी प्रजातियां एंटी आक्सीडेंट, विटामिन सी और अपने औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। यह समुद्र तल से लगभग 3200 फुट से 7200 फुट तक की ऊंचाई पर मिलती है। मौसम के अनुकूलन के साथ इसके पौधे जंगलों,घाटियों और सड़कों के किनारे भी पाए जाते है। 

कृषिऔर बागवानी में उपयोग 

ऐसी प्रजातियां कठोर जलवायु में भी आसानी से पनपती हैं। इतना ही नहीं कम पानी में भी यह आसानी से फलती-फूलती हैं। भविष्य में इसके जेनेटिक परिवर्तन के जरिए नई किस्में विकसित की जा सकती हैं,जो जलवायु परिवर्तन और मौसम के बदलते पैटर्न में विकसित हो सकती हैं। व्यावसायिक तौर की जाने वाली खेती के पौधों में बीमारियां जल्दी लग जाती हैं, ऐसे में इसके कुछ खास जींस के साथ बायोटेक्नोलोजी के जरिए उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जा सकती हैं। 

बनाई जा सकती हैं कैंसर, डायबिटीज, त्वचा रोगों की दवाएं 

हिमालय पर पाई वाली वनस्पतियो में एंटी ऑक्सीडेंट्स, फ्लेवोनॉयड्सऔर प्राकृतिक एंटी बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं। इस प्रजाति पर शोध करके कैंसर, डायबिटीज और च्वचा रोंगों के इलाज के लिए के नई दवाएं और नए सप्लीमेंट विकसित किए जा सकते हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य वर्धक  खाद्य पदार्थों और उच्च पोषण वाले उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा जूस जैम जेली जैसे पदार्थ भी बनाए जा सकते हैं। इसके सहारे स्थानीयय लोगों को रोजगार के संसाधन भी पैदा होंगे। 

क्या होता है फ्लेवोनॉयड्स का मतलब 

यह वह तत्व होका है जदो प्राकृतिक रूप से पेड़ पौधों, फलों, सब्जियों में पाया जाता है। आम भाषा में कहें तो यह एक ऐसा पोषक तत्व है जो उन्हें बाहरी बीमारियों से बचाने में मदद करता है। फलों के रंग और सुगंध के लिए भी यही तत्व मुख्य कारक होता है। पौधों को सूर्य.के अल्ट्री वायलेट किरणों से भी बचाता है। 

इसे भी पढेंः   चिंताजनक खुलासा! पृथ्वी पहले से कहीं ज्यादा तेजी से हो रही गर्म, नए अध्ययन में बड़ा दावा

 

Related to this topic: