यहां बैक्टीरिया सिर्फ रुकता नहीं, बल्कि खुद को इतना ताकतवर बना लेता है कि उस पर एंटीबायोटिक (एंटीमाइक्रोबियल) दवाएं असर करना बंद कर देती हैं।
ऑक्सफोर्ड: यहां बैक्टीरिया सिर्फ रुकता नहीं, बल्कि खुद को इतना ताकतवर बना लेता है कि उस पर एंटीबायोटिक (एंटीमाइक्रोबियल) दवाएं असर करना बंद कर देती हैं।
मुर्गियों की ज्यादा संख्या तो बैक्टीरिया का लंबे समय तक टिकना तय
मॉडलिंग से पता चला कि जब मुर्गियों की संख्या एक निश्चित स्तर से ऊपर पहुंच जाती है, तो जंगली पक्षियों से आए बैक्टीरिया भी पोल्ट्री आबादी में बिना बाहरी स्रोत के लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
बदलते माहौल के साथ खुद को ढाल रहा बैक्टीरिया
अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता ओकेम काइन का कहना है कि जैसे-जैसे 'कैम्पिलोबैक्टर', मुर्गियों के वातावरण के अनुरूप खुद को ढालता है, वैसे-वैसे वह ऐसे गुण भी विकसित कर लेता है जो उसे कठिन परिस्थितियों और एंटीबायोटिक दवाओं के बीच भी जीवित रहने में मदद करते हैं।
आधुनिक खेती और बीमारियों के बीच संबंध समझना जरूरी
उनके अनुसार, यदि भोजन से फैलने वाली बीमारियों का बोझ कम करना है, तो यह समझना बेहद जरूरी है कि आधुनिक कृषि पद्धतियां बैक्टीरिया के विकास और उनके व्यवहार को किस तरह बदल रही हैं।
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