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जलवायु परिवर्तन से बदल रहीं टैडपोल की आदतें

जलवायु परिवर्तन का बड़ा असर: मेंढकों के बच्चे भी बदल रहे अपनी आदतें

नई रिसर्च के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी से टैडपोल अपने खान-पान और विकास का तरीका बदल रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन का बड़ा असर मेंढकों के बच्चे भी बदल रहे अपनी आदतें

Climate Change Alters Tadpole Behaviour |

नई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा : जलवायु परिवर्तन का असर अब सिर्फ इंसानों या बड़े जानवरों तक सीमित नहीं है। एक नई रिसर्च में पता चला है कि बढ़ती गर्मी की वजह से मेंढकों के बच्चे, जिन्हें टैडपोल कहा जाता है, अपना खान-पान और बढ़ने का तरीका बदलने को मजबूर हो गए हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव भी उन्हें लंबे समय तक बचाने के लिए काफी नहीं है।

बदल रहा है टैडपोल का खान-पान

रिसर्च के अनुसार, पहले टैडपोल छोटे-छोटे जीवों को खाना पसंद करते थे। लेकिन जैसे-जैसे पानी का तापमान बढ़ रहा है, वे अब पौधों और काई पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। इतना ही नहीं, खुद को जिंदा रखने के लिए पहले से ज्यादा भोजन भी कर रहे हैं।

जल्दी बड़े, लेकिन कमजोर

वैज्ञानिकों ने पाया कि गर्म पानी में टैडपोल तेजी से बड़े तो हो जाते हैं, लेकिन उनका शरीर छोटा और कमजोर रह जाता है। इससे उनके लंबे समय तक जीवित रहने और आगे प्रजनन करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

सिर्फ मेंढकों की नहीं, पूरे पर्यावरण की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ मेंढकों की समस्या नहीं है। यह पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य श्रृंखला के लिए खतरे का संकेत है। अगर तालाब, नदियां और आर्द्रभूमि लगातार गर्म होती रहीं, तो कई जीवों का जीवन मुश्किल में पड़ सकता है।

ऐसे हुई रिसर्च

इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पुर्तगाल में पाए जाने वाले एक खास प्रजाति के मेंढक के बच्चों का अलग-अलग तापमान पर अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि तापमान बढ़ने के साथ टैडपोल के खान-पान और विकास में बड़ा बदलाव आने लगा।

वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ती गर्मी का सामना करने के लिए टैडपोल अपनी आदतें बदल रहे हैं, लेकिन अगर तापमान लगातार बढ़ता रहा तो यह तरीका भी उन्हें बचाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

बढ़ती गर्मी दे रही है बड़ा संकेत

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अध्ययन साफ बताता है कि जलवायु परिवर्तन अब प्रकृति की प्राकृतिक अनुकूलन क्षमता पर भी भारी पड़ने लगा है। अगर समय रहते वैश्विक तापमान को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में कई जीवों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।

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