प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

पानी और मिट्टी में छिपे सूक्ष्म जीव

पानी में छिपा खतरा: 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' और बढ़ती स्वास्थ्य चिंता

हाल ही में वैज्ञानिकों ने Free-living amoebae नाम के सूक्ष्म जीवों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इन अमीबा में खास प्रकार ऐसे हैं जो जानलेवा संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

पानी में छिपा खतरा ब्रेन-ईटिंग अमीबा और बढ़ती स्वास्थ्य चिंता

Hidden Water Threat: Rising Concern Over Brain-Eating Amoeba |

वाशिंगटन (अमेरिका)। हाल ही में वैज्ञानिकों ने Free-living amoebae नाम के सूक्ष्म जीवों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। ये अमीबा आमतौर पर मिट्टी, नदियों, झीलों और यहां तक कि घरों व शहरों की पानी सप्लाई सिस्टम में भी पाए जाते हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें से ज्यादातर इंसानों के लिए नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन कुछ खास प्रकार ऐसे हैं जो जानलेवा संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इन्हीं में से एक है Naegleria fowleri, जिसे “ब्रेन-ईटिंग अमीबा” कहा जाता है। यह आमतौर पर गर्म या दूषित पानी में पाया जाता है और जब ऐसा पानी नाक के जरिए शरीर में जाता है—जैसे तैरते समय—तो यह सीधे दिमाग तक पहुंच सकता है और बहुत तेजी से खतरनाक संक्रमण फैलाता है।

क्लोरीन से क्यों बच जाता है ये अमीबा?

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ये अमीबा बेहद मजबूत और जिद्दी होते हैं। जहां ज्यादातर कीटाणु गर्मी या क्लोरीन जैसे केमिकल्स से खत्म हो जाते हैं, वहीं ये आसानी से बच जाते हैं। इसका मतलब यह है कि सामान्य पानी साफ करने के तरीके हर बार इन पर असरदार नहीं होते, खासकर उन जगहों पर जहां पानी की पाइपलाइन पुरानी या ठीक से मेंटेन नहीं होती। यही वजह है कि ये चुपचाप पानी की सप्लाई सिस्टम में मौजूद रह सकते हैं और लोगों को पता भी नहीं चलता।

दूसरे रोगाणुओं को छिपाकर और बढ़ाते खतरे

इतना ही नहीं, ये अमीबा खुद ही खतरा नहीं हैं, बल्कि ये दूसरे खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस को भी अपने अंदर छिपाकर रखते हैं। इसे वैज्ञानिक “ट्रोजन हॉर्स इफेक्ट” कहते हैं। यानी ये एक तरह से दूसरे कीटाणुओं के लिए ढाल बन जाते हैं, जिससे वे लंबे समय तक जिंदा रहते हैं और बाद में इंसानों को संक्रमित कर सकते हैं। इससे बीमारियों का खतरा और भी बढ़ जाता है और इलाज करना भी मुश्किल हो सकता है।

बढ़ते तापमान के साथ फैलता खतरा

जलवायु परिवर्तन भी इस समस्या को और बढ़ा रहा है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ये अमीबा उन इलाकों में भी फैलने लगे हैं जहां पहले ये नहीं पाए जाते थे। खासकर गर्म पानी वाली झीलों, स्विमिंग एरिया और कमजोर पानी सप्लाई सिस्टम वाले क्षेत्रों में इसका खतरा ज्यादा देखा जा रहा है। पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिससे वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता और बढ़ गई है।

समय रहते कदम उठाना जरूरी

इसीलिए अब विशेषज्ञ साफ तौर पर कह रहे हैं कि हमें इस अदृश्य खतरे को गंभीरता से लेना होगा। इसके लिए पानी की बेहतर निगरानी, नई और ज्यादा प्रभावी वॉटर ट्रीटमेंट तकनीकों का इस्तेमाल और हेल्थ, पर्यावरण व जल प्रबंधन से जुड़े विभागों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है। आसान शब्दों में कहें तो साफ और सुरक्षित पानी ही सबसे बड़ा बचाव है। यह खतरा भले आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया गया, तो यह भविष्य में एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकता है।

यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/state/up-launches-cm-fellowship-program-to-boost-trillion-dollar-economy-goal/182732

यूपी में ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए CM फेलोशिप कार्यक्रम को मंजूरी

Related to this topic: