नासा के प्रशासन ने कहा कि वैसा परिणाम नहीं मिला जिसकी हमने उम्मीद की थी। यह वह परिणाम नहीं है जिसके लिए हम काम कर रहे थे। फिर भी इस बचाव अभियान के अनुभवों से हम सीखते रहेंगे।
वाशिंगटन। नासा की नील गेहरेल्स स्विफ्ट वेधशाला इस साल के अंत में पृथ्वी पर गिर जाएगी। इसको बचाने के लिए एक निजी मिशन भेजा गया था, लेकिन वह फेल हो गया। अब वैज्ञानिकों ने इसके फिर से बचाने की उम्मीदें भी छोड़ दी हैं। इसे बचाने के लिए निजी कंपनी केटेलिस्ट स्पेस द्वारा डिजाइन लिंक नाम से बचाव अभियान 3 जुलाई को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य लगातार नीचे की ओर आ रहे टेलीस्कोप को ऊंची कक्षा में भेजने था, हालांकि बाद के हफ्तों में उसमें ही समस्याएं आने लगीं। इसकी वजह से मिशन नियंत्रण से बाहर हो गया। अंततः नासा को तीन दिन पहले 19 अगस्त को घोषणा करनी पड़ी कि मिशन को योजना के मुताबिक आगे नहीं चलाया जा सकता। इस मिशन के विफल होने के बाद इस टेलीस्कोप का पृथ्वी पर गिरना तय हो गया है। नासा के प्रशासन ने कहा कि वैसा परिणाम नहीं मिला जिसकी हमने उम्मीद की थी। यह वह परिणाम नहीं है जिसके लिए हम काम कर रहे थे। फिर भी इस बचाव अभियान के अनुभवों से हम सीखते रहेंगे।
ब्रह्मांड के शक्तिशाली गामा किरण में विस्फोट को देखने के लिए भेजा था टेलीस्कोप
इस टेलीस्कोप को ब्रह्मांड के सर्वाधिक शक्तिशाली विस्फोटों विशेषकर गमा किरण में विस्फोट के लिए भेजा गया था। समय के साथ यह पृथ्वी के बाहर के वायुमंडल के बाहरी हिस्सों में बिखरे पड़े अणुओं से टकराता रहा। इस घर्षण की वजह से इसकी गति धीमी हो गई और इसकी ऊंचाई कम हो गई। इसी ऊंचाई को बूस्ट करने के लिए यह बचाव अभियान शुरू किया गया था। इतना ही नही हाल के सालों में सौर गितविधियां बढ़ गईं जिसकी वजह से पृथ्वी के बाहरी वायुमंडल का विस्तार होता गया। परिणामस्वरूप इससे टकराने वाले अणुओं की संख्या बढ़ती गई, जिसके चलते इसकी गति और धीमी हो गई। जैसे- जैसे गति धीमी होती गई यह पृथ्वी के कराब आता गया।
बचाव मिशन पर 30 लाख मिलियन ढालर खर्च हुए
बचाव मिशन पर कुल 30 मिलियन डालर खर्च हुए थे। योजना के मुताबिक इसको एक महीने के बाद वेधशाला से मिलकर ऊंची कक्षा में भेजना था, लेकिन जुलाई के अंत में बिजली के समस्या आने के कारण इसकी गति को संचालित करने वाले दो उपकरण प्रभावित हुए और यह नियंत्रण से बाहर हो गया। नासा के एस्ट्रो फिजिक्स विभाग का कहना है कि हम जानते थे कि यह हाई रिस्क और उच्च लाभा वाला मिशन था। इसे सूर्य की गतिविधि से प्रेरित होकर विकसित किया गया था। हालांकि नासा का कहना है कि ऊंचाई नियंत्रण संबंधित समस्याओं के चलते मिशन के लक्ष्यों को छोड़ना पड़ा है, लेकिन परियोजना पूरी तरह से रद्द नहीं की गई है। 2004 में इस वेधशाला को भेजा गया था, उस समय इसका लक्ष्य न्यूनतम दो साल और अधिकतम सात साल तक का काम करना था। इस तरह यह 20 नवंबर 2004 से 21 सालों तक निरंतर काम करता रहा। संभावना है कि यह इस वर्ष के अंत में यह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाएगा और गिरने के साथ ही इसकी यात्रा समाप्त हो जाएगी।