यूपीआई ने देश में डिजिटल पेमेंट को तेज और आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं। संसद में सरकार द्वारा बताए गए आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को दिखाते हैं।
FY24 में सबसे ज्यादा नुकसान
सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में यूपीआई से ठगी के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए। इस दौरान लाखों लोगों के साथ फ्रॉड हुआ और करीब 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम चली गई।
अब मामलों में आई गिरावट
इसके बाद स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला। वित्त वर्ष 2025 में फ्रॉड के मामलों की संख्या कम हुई और ठगी की रकम भी घट गई। मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक नुकसान का आंकड़ा लगभग 800 करोड़ रुपये के आसपास है।
रिकवरी दर ने बढ़ाई चिंता
फ्रॉड की संख्या भले ही घटी हो, लेकिन पैसा वापस मिलने की संभावना बहुत कम है। सरकार के मुताबिक, शिकायतों पर कार्रवाई तो होती है, लेकिन बहुत कम लोगों को ही उनकी रकम वापस मिल पाती है।
फ्रॉड रोकने के लिए नए कदम
यूपीआई से जुड़ी संस्थाओं ने सुरक्षा को मजबूत किया है। नए नियमों के तहत ट्रांजैक्शन लिमिट, डिवाइस बदलने पर रोक और संदिग्ध लेन-देन की पहचान पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
यूजर्स को रहने की जरूरत सतर्क
सरकारी आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि सावधानी सबसे जरूरी है। अनजान कॉल, मैसेज या लिंक से दूरी रखना ही यूपीआई फ्रॉड से बचने का सबसे बेहतर तरीका है।
यह भी पढ़े: ममता की पार्टी की बूथ एजेंटों से बैठक
https://www.primenewsnetwork.in/india/mamata-party-state-level-meeting-with-booth-agents/101562