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नोस्कोवा का ग्रैंड स्लैम सपना पूरा

लिंडा नोस्कोवा ने रचा इतिहास, जीता पहला विंबलडन महिला एकल खिताब

चेक टेनिस स्टार लिंडा नोस्कोवा ने कैरोलिना मुचोवा को हराकर अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता और विंबलडन महिला एकल चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

लिंडा नोस्कोवा ने रचा इतिहास जीता पहला विंबलडन महिला एकल खिताब

Linda Noskova Wins Maiden Grand Slam Title at Wimbledon 2026 |

लंदन,(यूके)। चेक टेनिस खिलाड़ी लिंडा नोस्कोवा ने शनिवार को अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीत लिया। उन्होंने महिला एकल फाइनल में अपनी हमवतन कैरोलिना मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराकर विंबलडन 2026 की ट्रॉफी अपने नाम की।

नोस्कोवा का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब

21 वर्षीय नोस्कोवा का यह पहला ग्रैंड स्लैम खिताब और करियर का तीसरा डब्ल्यूटीए एकल खिताब है। इस जीत के साथ वह अपनी आदर्श रही पेट्रा क्वितोवा के बाद विंबलडन महिला एकल खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की चेक खिलाड़ी बन गई हैं। क्वितोवा ने 2011 में यह प्रतिष्ठित खिताब जीता था और इस बार उन्होंने रॉयल बॉक्स से फाइनल मुकाबला देखा।

ग्रैंड स्लैम फाइनल जीतने वाली क्वितोवा के बाद दूसरी चेक खिलाड़ी

नोस्कोवा विंबलडन में अपना पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल जीतने वाली क्वितोवा के बाद दूसरी चेक खिलाड़ी बन गई हैं। इस शानदार प्रदर्शन के बाद उनकी डब्ल्यूटीए रैंकिंग में भी बड़ा उछाल आने की उम्मीद है और वह सोमवार को जारी होने वाली रैंकिंग में करियर की सर्वश्रेष्ठ सातवीं रैंकिंग हासिल कर सकती हैं।

कैरोलिना मुचोवा ने कड़ा संघर्ष किया

फाइनल में हार के बावजूद कैरोलिना मुचोवा ने कड़ा संघर्ष किया। उन्होंने दूसरे सेट में पांच चैंपियनशिप प्वाइंट बचाकर शानदार वापसी की और मुकाबले को निर्णायक सेट तक पहुंचाया। यह किसी ग्रैंड स्लैम महिला एकल फाइनल में बचाए गए सबसे अधिक चैंपियनशिप प्वाइंट का रिकॉर्ड है। मुचोवा की रैंकिंग भी करियर की सर्वश्रेष्ठ छठी स्थान तक पहुंचने की उम्मीद है।

पिछले चार वर्षों में विंबलडन खिताब जीतने वाली तीसरी चेक महिला

नोस्कोवा की जीत ने चेक टेनिस की मजबूत परंपरा को और आगे बढ़ाया है। वह देश की पांचवीं ग्रैंड स्लैम महिला एकल चैंपियन बन गई हैं और पिछले चार वर्षों में विंबलडन खिताब जीतने वाली तीसरी चेक महिला खिलाड़ी हैं। यह फाइनल मुकाबला 1990 के बाद विंबलडन महिला एकल का पहला ऐसा फाइनल था, जिसमें दोनों खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट से पहले ग्रास-कोर्ट वार्म-अप प्रतियोगिताएं जीती थीं। नोस्कोवा ने बर्लिन खिताब जीता था, जबकि मुचोवा ने बैड होम्बर्ग में ट्रॉफी हासिल की थी।

नोस्कोवा का शुरुआत से ही दबदबा

मैच में नोस्कोवा ने शुरुआत से ही दबदबा बनाया और पहले सेट में मुचोवा की सर्विस दो बार तोड़कर करीब 30 मिनट में सेट अपने नाम कर लिया। हालांकि, मुचोवा ने दूसरे सेट में शानदार वापसी करते हुए लगातार पांच गेम जीते और मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। निर्णायक सेट में नोस्कोवा ने अपना संयम बनाए रखा, शुरुआती बढ़त हासिल की और छठे चैंपियनशिप प्वाइंट पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। खिताब जीतने के बाद उन्होंने सेंटर कोर्ट की घास पर लेटकर अपनी यादगार जीत का जश्न मनाया। (ANI)

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