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93 हजार से अधिक लोगों को सौंपे गए गोवंश

सीएम सहभागिता योजना से 1.67 लाख गोवंश का संरक्षण

यूपी में सीएम सहभागिता योजना के तहत 93,287 लाभार्थियों को 1.67 लाख से अधिक गोवंश सौंपे गए हैं। वहीं, 62 जिलों में करीब 39,722 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है।

सीएम सहभागिता योजना से 167 लाख गोवंश का संरक्षण

93 हजार से अधिक लोगों को सौंपे गए गोवंश |

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के संरक्षण के साथ ही उनके बेहतर पालन-पोषण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में सीएम सहभागिता योजना के माध्यम से निराश्रित गोवंश को इच्छुक एवं पात्र लाभार्थियों को सुपुर्द कर उनका संरक्षण और देखभाल सुनिश्चित किया जा रहा है। 

93 हजार से अधिक लाभार्थियों को 1.67 लाख गोवंश सौंपे गए

अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत अब तक 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश को सुरक्षित एवं बेहतर आश्रय उपलब्ध हुआ है। साथ ही ग्रामीण परिवारों को गोवंश के पालन-पोषण से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत करने का भी प्रयास किया जा रहा है। 

सीएम सहभागिता योजना से गोवंश संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

उन्होंने बताया कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर निराश्रित गोवंश की समस्या को कम करने के साथ-साथ गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को जनसहभागिता से प्रभावी बनाया जा रहा है। सीएम सहभागिता योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत लाभार्थियों द्वारा सुपुर्द किए गए गोवंश की देखभाल, चारा-पानी एवं संरक्षण की जिम्मेदारी ली जाती है। इससे गोवंश को सुरक्षित वातावरण मिलता है और पशुपालन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करने में मदद मिलती है।

62 जिलों में 39,721 हेक्टेयर गोचर भूमि कब्जामुक्त

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में सार्वजनिक एवं गोचर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के 62 जनपदों में कुल 39,721.541 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता गोचर भूमि को सुरक्षित रखते हुए उसका उपयोग गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सुनिश्चित करना है। इससे निराश्रित गोवंश के संरक्षण की व्यवस्था को और मजबूती मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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