बलिया में गंगा और घाघरा के बढ़े जलस्तर से करीब 87 गांव और 3 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। बाढ़ के पानी में रील और स्टंट बनाने वालों पर पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है।
उत्तर प्रदेश: बलिया जिले में गंगा और घाघरा नदियों के जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में भारी तबाही मचा रखी है। दोनों प्रमुख नदियां चेतावनी बिंदु से ऊपर बह रही हैं, जिसके चलते जिले के करीब 87 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। लगभग 3 लाख से अधिक आबादी इस जलप्रलय से सीधे तौर पर प्रभावित है। इसी बीच बाढ़ के गहरे पानी में स्टंट और रील बनाने वालों की बढ़ती हरकतों को देखते हुए बलिया पुलिस ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।
रील-लाइक्स के चक्कर में जान जोखिम में न डालें: ओमवीर सिंह
जिले में पुल-पुलिया और जलजमाव वाले स्थानों पर युवाओं द्वारा जान जोखिम में डालकर वीडियो बनाने पर पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है। एसपी ने स्पष्ट कहा कि सोशल मीडिया पर चंद 'लाइक्स' और 'रील' के चक्कर में लोग अपनी जिंदगी दांव पर न लगाएं। एसपी ने बताया कि हाल ही में जब मैं और जिलाधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण पर थे, तब कई जगहों पर लोग गहरे पानी में नहाते और लापरवाही बरतते दिखे, जिन्हें मौके पर ही रोका गया। नए बने ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के पुल के दोनों तरफ गंगा का पानी भरा है, जहां लोग नहाने और वीडियो बनाने पहुंच रहे हैं। वहां लगातार पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है।
जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की चेतावनी
नदियों के बंधों और गांवों के बीच भारी मात्रा में पानी जमा हो गया है। बच्चों और किशोरों के इसमें नहाने से कई हादसे सामने आए हैं। इसे रोकने के लिए बाढ़ प्रभावित थानों की पुलिस, मिशन शक्ति की महिला आरक्षी और बीट कांस्टेबल गांव-गांव भ्रमण कर रहे हैं। लाउडहेलर और ध्वनि विस्तारक यंत्रों से लगातार मुनादी कराई जा रही है कि कोई भी व्यक्ति या बच्चा जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाए, क्योंकि जमा पानी में गहराई का अंदाजा लगाना नामुमकिन है। प्रशासन और पुलिस ने जनता से अपील की है कि आपदा की इस घड़ी में सतर्क रहें और किसी भी ऐसे जोखिम भरे कृत्य से बचें जो जानलेवा साबित हो सकता है।
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