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स्वस्थ उत्तर प्रदेश का दावा सफेद झूठः वंशराज दुबे

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर आप ने साधा सरकार पर निशाना

आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने प्रदेश की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। वोले पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर आप ने साधा सरकार पर निशाना

आप प्रवक्ता बंशराज दुबे |

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर आप ने साधा सरकार पर निशाना

‘स्वस्थ उत्तर प्रदेश’ का दावा सफेद झूठः वंशराज दुबे

2026 में भी एक्सरे की फिल्म नहीं, मशीनें धूल फांक रहीं

लखनऊ।
आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने प्रदेश की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘स्वस्थ उत्तर प्रदेश’ का दावा पूरी तरह सफेद झूठ साबित हो रहा है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के 8,689 पद खाली पड़े हैं और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का भी भारी अभाव है। इसका सीधा असर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और जिला अस्पतालों पर पड़ रहा है, जहां मरीजों को इलाज के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है और कई बार डॉक्टरों की अनुपस्थिति में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।

वंशराज दुबे ने कहा कि भाजपा सरकार एक तरफ प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने का दावा करती है, लेकिन हकीकत यह है कि राजधानी लखनऊ से लेकर सुदूर गांवों तक सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है। 8,600 से अधिक पदों का खाली होना यह बताता है कि भाजपा सरकार के लिए जनता के स्वास्थ्य की कोई प्राथमिकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण गरीब मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जहां उनसे मनमाने तरीके से पैसे वसूले जाते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े खुद सरकार की पोल खोल रहे हैं। विभाग में लेवल-2 के 7,240 पदों में से 5,497 पद खाली हैं, जबकि लेवल-3 के 5,199 पदों में केवल 2,007 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। यही नहीं, वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर भी भारी कमी है। संयुक्त निदेशक के 2,555 पदों में से 1,330 पद खाली, एडिशनल डायरेक्टर के 70 पदों में से 58 पद रिक्त, जबकि डिप्टी डायरेक्टर (सर्जन) के 970 पदों में से 157 पद खाली हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर मैनपावर संकट से जूझ रही है।

दुबे ने कहा कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार ने 2,391 डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें 601 विशेषज्ञ डॉक्टर और 1,790 एमबीबीएस डॉक्टरों के पद शामिल थे। इसके लिए आवेदन भी लिए गए और जनवरी में इंटरव्यू भी आयोजित हुए, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी भर्ती का परिणाम घोषित नहीं हुआ और पूरी प्रक्रिया मेरिट व पारदर्शिता के विवाद में उलझ गई। इससे यह साफ हो गया है कि भाजपा सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्कर कटवाने में ज्यादा दिलचस्पी रखती है।

उन्होंने कहा कि लेवल-2 और लेवल-3 डॉक्टरों की भारी कमी का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। CHC और PHC जैसे अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण गरीब और ग्रामीण मरीजों को इलाज के लिए या तो शहरों की ओर भागना पड़ता है या फिर निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है। कई जगहों पर सरकारी अस्पतालों की हालत यह है कि वहां सिर्फ पर्चा काट दिया जाता है, लेकिन इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं होती।

वंशराज दुबे ने अपने चित परिचित अंदाज में योगी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जुमलेबाजी से बीमारियां ठीक नहीं होतीं। अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता हिंदू-मुस्लिम की राजनीति और बुलडोजर की कार्रवाई से ऊपर उठकर कभी जनता के स्वास्थ्य पर भी होती, तो आज उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में इलाज के अभाव में लोग दम नहीं तोड़ रहे होते।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर मरीजों को अस्पताल की दवा देने के बजाय बाहर के मेडिकल स्टोर का पता बताते नजर आते हैं। गरीब मरीजों को अपनी गाढ़ी कमाई से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। यह सवाल उठता है कि आखिर वह कौन सा भ्रष्टाचार का सिंडिकेट है जो सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवाओं को मरीजों तक पहुंचने नहीं दे रहा है।

सरकार के आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर कटाक्ष करते हुए दुबे ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक स्थिति है कि साल 2026 में भी उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में एक्सरे की फिल्म तक उपलब्ध नहीं है। मरीजों को एक्सरे रिपोर्ट फोटोकॉपी के कागज पर दी जा रही है। कई अस्पतालों में आधुनिक जांच मशीनें या तो मौजूद नहीं हैं और जहां हैं भी, वहां बजट और रखरखाव के अभाव में धूल फांक रही हैं। सवाल यह है कि बिना फिल्म और बिना मशीनों के आखिर इलाज कैसे होगा? क्या सरकार जादू से मरीजों को ठीक करने का दावा कर रही है?

आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के सभी खाली पदों पर तत्काल पारदर्शी तरीके से भर्ती की जाए, सरकारी अस्पतालों में दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना लागू की जाए। यदि सरकार जल्द इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती है तो आम आदमी पार्टी जनता के स्वास्थ्य के मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी।

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