उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में इन दिनों पारा 41 डिग्री के पार पहुँच चुका है। जहाँ आम लोगों के लिए...
उज्जैन के भीषण गर्मी में अघोरी बाबा की कठिन साधना, ढाई साल से खड़े होकर कर रहे हैं तप
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उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में इन दिनों पारा 41 डिग्री के पार पहुँच चुका है। जहाँ आम लोगों के लिए दोपहर में घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है, वहीं शिप्रा तट स्थित चक्रतीर्थ श्मशान में अघोरी बाबाओं की कठिन तपस्या श्रद्धा और आश्चर्य का केंद्र बनी हुई है।
कंडों के बीच अष्टधूनी तप
अघोरी बाबा चिलचिलाती धूप में जलते हुए कंडों (उपलों) के बीच बैठकर 'अष्टधूनी' तप कर रहे हैं। यह साधना दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चलती है, जब गर्मी अपने चरम पर होती है। इस साधना की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक अघोरी बाबा पिछले ढाई साल से लगातार खड़े हैं। उन्होंने खड़े रहकर ही अपनी साधना जारी रखने का संकल्प लिया है।
शरीर पर ताजी चिता की राख, मन को केंद्रित करना
तपस्या के दौरान साधु अपने शरीर पर ताजी चिता की भस्म (राख) लपेटे रहते हैं। तंत्र साधना की मान्यताओं के अनुसार, यह शरीर और मन को साधने की एक कठोर प्रक्रिया है। अघोरी परंपरा में इस प्रकार की कठिन साधना का उद्देश्य इंद्रियों पर विजय प्राप्त करना, आत्म-साक्षात्कार और तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति माना जाता है। भीषण गर्मी और अग्नि के बीच बैठकर वे पंचतत्वों को साक्षी मानकर अपनी भक्ति में लीन रहते हैं। चक्रतीर्थ में हो रही इस अनूठी और कठिन साधना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग और अन्य साधु-संत भी वहां पहुँच रहे हैं।
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