दिल्ली-आगरा हाईवे पर हर किलोमीटर AI कैमरे लगेंगे। NHAI की ATMS परियोजना से दुर्घटना, जाम और अन्य घटनाओं का तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलेगा।
मथुरा {उत्तर प्रदेश}। दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर को अधिक सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) परियोजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। योजना के तहत दिल्ली से आगरा तक हर किलोमीटर पर एआई आधारित ऑटो ट्रैकिंग कैमरे लगाए जा रहे हैं। अगले पांच माह में परियोजना पूरी होने के बाद दुर्घटना, जाम और अन्य असामान्य गतिविधियों की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी।
तेजी से चल रहा कैमरे लगाने का काम
एनएचएआई के अनुसार, कैमरों और डिजिटल डिस्प्ले के लिए पोल व फाउंडेशन स्लैब लगाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। प्रत्येक कैमरा करीब एक किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी करेगा और उसकी रिकॉर्डिंग लंबे समय तक सुरक्षित रखी जाएगी। इससे जरूरत पड़ने पर किसी भी घटना का विश्लेषण आसानी से किया जा सकेगा।
AI तुरंत भेजेगा कंट्रोल रूम को अलर्ट
एआई तकनीक से लैस यह प्रणाली सड़क दुर्घटना, जाम, सड़क पर अवरोध, पशुओं की मौजूदगी और अन्य असामान्य गतिविधियों की पहचान कर तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेगी। इसके लिए महुअन टोल प्लाजा के पास एनएचएआई कार्यालय परिसर में अत्याधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है। अलर्ट मिलते ही ऑपरेटर संबंधित इमरजेंसी सेवाओं को सूचना देंगे, जिससे राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू हो सके।
यातायात नियम तोड़ने वालों पर रहेगी कड़ी नजर
नई व्यवस्था के तहत ओवरस्पीड, सीट बेल्ट नहीं लगाने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने, ब्लैक फिल्म लगे वाहनों और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों की पहचान कर चालान की कार्रवाई में भी एआई कैमरे मदद करेंगे। ओवरस्पीड वाहनों की निगरानी के लिए फुटओवर ब्रिज और ओवरहेड संरचनाओं पर विशेष कैमरे लगाए जाएंगे।
डिजिटल डिस्प्ले से मिलेगी रियल टाइम जानकारी
हाईवे पर कैमरों के साथ डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं। इन पर वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा से जुड़े संदेश, यातायात संबंधी जानकारी और वाहन की गति दिखाई जाएगी, जिससे चालक समय रहते सतर्क होकर सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे।
दुर्घटनाओं पर तेजी से होगा रेस्क्यू
एनएचएआई का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद हाईवे की निगरानी पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी होगी। एआई आधारित निगरानी प्रणाली के कारण दुर्घटना या किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू किया जा सकेगा, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और बेहतर होगी।
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