प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम

AIIMS भोपाल में मातृ मृत्यु मामलों में...

AIIMS भोपाल में मातृ मृत्यु मामलों में मुफ़्त क्लिनिकल ऑटोप्सी शुरू

भोपाल। All India Institute of Medical Sciences Bhopal ने मातृ मृत्यु (pregnancy-related deaths) के मामलों में...

aiims भोपाल में मातृ मृत्यु मामलों में मुफ़्त क्लिनिकल ऑटोप्सी शुरू

AIIMS भोपाल में मातृ मृत्यु मामलों में मुफ़्त क्लिनिकल ऑटोप्सी शुरू |

भोपाल। All India Institute of Medical Sciences Bhopal ने मातृ मृत्यु (pregnancy-related deaths) के मामलों में मुफ़्त क्लिनिकल (पैथोलॉजिकल) ऑटोप्सी शुरू की है। इसका उद्देश्य मातृ मृत्यु के पीछे के वैज्ञानिक और वास्तविक चिकित्सा कारणों का पता लगाना है, न कि कानूनी जांच करना।

केवल लिखित सहमति जरूरी

इसमें पुलिस पोस्टमॉर्टम नहीं होती, कोई FIR या कानूनी प्रक्रिया नहीं है, इसमें पुलिस की जरूरत नहीं है और केवल परिवार की लिखित सहमति से किया जाता है। इससे परिवारों पर कानूनी दबाव कम होता है। इसमें सम्मानजनक और न्यूनतम हस्तक्षेप होता है। केवल आवश्यक छोटे ऊतक (tissue) नमूने लिए जाते हैं। जांच के बाद सभी अंग वापस अपनी जगह रखे जाते हैं। चेहरे पर कोई दिखाई देने वाला नुकसान नहीं होता। शरीर को पूरी गरिमा के साथ परिवार को सौंपा जाता है। यह सामाजिक और भावनात्मक रूप से स्वीकार्य प्रक्रिया है।

यह तेज़ प्रक्रिया है

पूरी जांच लगभग 90 मिनट में पूरी होती होती है। इसमें हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जांच शामिल होती है। कम समय में सटीक और वैज्ञानिक परिणाम मिलते हैं।

क्या है वैज्ञानिक महत्व?

इस प्रक्रिया से ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है जो अक्सर सामान्य इलाज में छूट जाती है। जैसे छिपे हुए संक्रमण (जैसे सेप्सिस), अत्यधिक रक्तस्राव के कारण, अंगों की विफलता (organ failure), गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएँ (जैसे एक्लेम्पसिया, एम्बोलिज्म) के बारे में पता चलता है।  

स्वास्थ्य प्रणाली पर प्रभाव

इसमें सही डेटा प्राप्त होता है। भारत में कई बार मातृ मृत्यु के कारण सही तरीके से दर्ज नहीं होते। यह पहल सटीक कारण पहचानने में मदद करेगी।

नीतियों में सुधार

इससे बेहतर स्वास्थ्य नीतियाँ बनेंगी, रेफरल सिस्टम मजबूत होगा, आपातकालीन मातृत्व सेवाओं में सुधार होगा।

मातृ मृत्यु दर (MMR) में कमी

यह पहल रोकथाम योग्य कारणों की पहचान करेगी। साथ ही समय पर इलाज को बेहतर बनाएगी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

Madhavanand Kar के अनुसार, कई मामलों में मृत्यु के कारण स्पष्ट नहीं होते। क्लिनिकल ऑटोप्सी छिपे हुए कारणों को सामने लाती है। इससे भविष्य में ऐसी मौतों को रोका जा सकता है।

क्या है चुनौतियाँ?

परिवार की सहमति प्राप्त करना, अन्य अस्पतालों में इसे लागू करना, डेटा को स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ना जरूरी है।  

विशेषज्ञों की उपलब्धता

यह एक महत्वपूर्ण और प्रभावी स्वास्थ्य पहल है। कानूनी झंझट कम करती है। वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करती है। मातृ स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाती है और सही तरीके से लागू होने पर यह पूरे भारत के लिए एक मॉडल बन सकती है।

यह भी पढ़ें : https://www.primenewsnetwork.in/state/congress-releases-list-of-candidates-for-west-bengal-assembly-elections/152818

Related to this topic: