सागर। जिले से मानवता और सामाजिक सुधार की एक अच्छी पहल की गई। यहाँ एक पिता ने दहेज जैसी कुप्रथा को दरकिनार कर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है।
सागर। जिले से मानवता और सामाजिक सुधार की एक अच्छी पहल की गई। यहाँ एक पिता ने दहेज जैसी कुप्रथा को दरकिनार कर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है।
सगाई समारोह में दिये थे 1.21 लाख रूपये
सागर जिले की रहली तहसील के ग्राम किशनगढ़ में हाल ही में एक सगाई समारोह (लगुन/फलदान) आयोजित किया गया था। इस रस्म के दौरान वधू पक्ष की ओर से दूल्हे के पिता, कमलेश पटेल, को 1.21 लाख रुपये की नकद राशि भेंट की गई थी।
लड़के के पिता का सराहनीय कदम
जैसे ही रुपयों की थाल कमलेश पटेल के सामने आई, उन्होंने पूरी विनम्रता के साथ उस बड़ी रकम को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने न केवल पैसे लौटाए, बल्कि एक ऐसी बात कही जिसने सबका दिल जीत लिया। समधी जी, यह पैसे आप अपनी छोटी बेटी की पढ़ाई और उसके भविष्य के लिए रखें। हमें दहेज नहीं, सिर्फ आपका रिश्ता चाहिए।
शगुन में यह लिया
दहेज की बड़ी रकम को लौटाते हुए, कमलेश पटेल के परिवार ने परंपरा का सम्मान करने के लिए शगुन के तौर पर मात्र 11 रुपये नकद, एक नारियल लिये। इन्हीं दो चीजों के साथ विवाह की रस्मों को पूरा किया गया।
समाज के लिए संदेश
आज के दौर में जहाँ शादियों में दिखावा और दहेज का लेनदेन एक बड़ी समस्या बना हुआ है, वहीं पटेल परिवार के इस फैसले की पूरे क्षेत्र में प्रशंसा हो रही है। यह घटना दर्शाती है कि बेटियां और उनकी शिक्षा, किसी भी धन-दौलत से कहीं अधिक मूल्यवान हैं। बदलाव की शुरुआत घर से ही होती है। कमलेश पटेल जैसा साहस अगर हर पिता दिखाए, तो समाज से दहेज का कलंक पूरी तरह मिटाया जा सकता है।
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