खंडवा। यहां के आदिम जाति कल्याण विभाग में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब सेवानिवृत्ति से ठीक पहले बड़े पैमाने पर तबादला और पदस्थापना आदेश जारी किए गए।
खंडवा। यहां के आदिम जाति कल्याण विभाग में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब सेवानिवृत्ति से ठीक पहले बड़े पैमाने पर तबादला और पदस्थापना आदेश जारी किए गए। सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला ने 26 मार्च से 31 मार्च के बीच 61 तबादला आदेश जारी किए, जिनमें शिक्षक, छात्रावास अधीक्षक और सहायक स्टाफ शामिल थे। कुछ मामलों में पदोन्नति भी दी गई। शुक्ला 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गए, और अब उनके खिलाफ विभागीय जांच की मांग तेज हो रही है।
मंजूरी प्रक्रिया को दरकिनार करने का लगा आरोप
आरोप है कि ये तबादला आदेश जिले के प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बिना और कलेक्टर को जानकारी दिए बिना जारी किए गए। यह विभाग मंत्री विजय शाह के अधीन आता है, फिर भी आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियां नहीं ली गईं। सूत्रों का दावा है कि कई आदेश अधिकारी के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जारी किए गए।
तबादलों और पदस्थापनाओं में रिश्वत लेने का आरोप
जय आदिवासी युवा संगठन ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तबादलों और पदस्थापनाओं के बदले पैसे लिए गए। इसमें कहा गया है कि छात्रावास अधीक्षक हेमंत सिन्हा बिचौलिये के रूप में काम कर रहे थे और शिक्षक व अन्य अधिकारी उन्हें और उनके बेटे को ऑनलाइन भुगतान कर रहे थे। इसके अलावा राजगढ़, पंधाना, हरसूद, खंडवा, मोजवाड़ी, जमन्या, बेड़ीमाल, खुटला, आसा और नेतिसराय जैसे क्षेत्रों के 61 छात्रावासों और आश्रमों में पदस्थापन, निर्माण कार्य और वित्तीय लेन-देन में भी अनियमितताएं सामने आई हैं।
छात्रावास अधीक्षकों से हर महीने अवैध वसूली का आरोप
पदोन्नति के लिए ₹5000 से ₹10000 तक लिए जाने की बात कही जा रही है। इसके साथ 50 से अधिक शिक्षकों को बिना अनुमति अटैच करने का आरोप भी लगा है।
सेवानिवृत्त अधिकारी ने आरोपों से किया इनकार
संतोष शुक्ला ने आरोपों पर कहा कि वे अस्वस्थ थे और सेवा के अंतिम दिन कार्यालय नहीं गए। उन्होंने कहा कि सभी तबादला और पदस्थापना आदेश नियमों के अनुसार जारी किए गए हैं।
मंत्री ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
खंडवा जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि इन तबादलों के लिए उनसे कोई अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने कहा, “यदि आदिम जाति कल्याण विभाग में ऐसे आदेश जारी हुए हैं, तो सभी को निरस्त किया जाएगा।”
पुराने विवाद और लोकायुक्त की कार्रवाई
संतोष शुक्ला पहले भी विवादों में रह चुके हैं। वे रीवा के निवासी हैं और बताया जाता है कि उनका संबंध उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला से है। करीब सात साल पहले, मंडला जिले में पदस्थ रहने के दौरान उनके यहां आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त ने छापा मारा था। जांच में रीवा और जबलपुर में बेनामी संपत्तियां सामने आई थीं।
2023 में हाईकोर्ट की फटकार
डिंडोरी जिले में पदस्थ रहते हुए 6 नवंबर 2023 को न्यूनतम वेतन भुगतान से जुड़े एक मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी। बाद में उन्होंने शपथपत्र के माध्यम से बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन अदालत उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुई और आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए थे।
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