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गोमती पुस्तक महोत्सव में छात्रों से मिले शुभांशु

अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने किया लखनऊ विश्वविद्यालय का दौरा, छात्रों को अंतरिक्ष भविष्य के लिए किया प्रेरित

अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों से बातचीत की और उन्हें भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने किया लखनऊ विश्वविद्यालय का दौरा छात्रों को अंतरिक्ष भविष्य के लिए किया प्रेरित

Astronaut Shubhanshu Shukla Meets Students at Lucknow University |

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला मंगलवार को अपने गृह नगर लखनऊ लौटे और गोमती पुस्तक महोत्सव के तहत छात्रों से बातचीत करने तथा अपनी पुस्तक द सेकंड ऑर्बिट पर चर्चा के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय का दौरा किया। विश्वविद्यालय के श्रोताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने उस स्थान पर लौटने पर गहरी खुशी जताई जहां से उनके जीवन की यात्रा शुरू हुई थी। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों के साथ सीधे जुड़ना भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव के बारे में उन्हें सूचित रखने और भावी पीढ़ी को विज्ञान व अन्वेषण में करियर के लिए प्रेरित करने हेतु बेहद महत्वपूर्ण है।

बच्चों के साथ बातचीत और प्रश्नोत्तर सत्र पर जोर

शुभांशु शुक्ला ने कहा कि वह गोमती पुस्तक महोत्सव में भाग लेने और बच्चों के साथ अपनी पुस्तक द सेकंड ऑर्बिट पर चर्चा करने के लिए लखनऊ आए हैं। उन्होंने वहां मौजूद बड़ी संख्या में बच्चों की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह उनके साथ बातचीत करेंगे और प्रश्नोत्तर सत्र भी होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि भारत भविष्य के लिए, खासकर अंतरिक्ष क्षेत्र में, क्या कर रहा है। उनके मुताबिक, इस जानकारी से बच्चे उत्साहपूर्वक भाग लेने और इस क्षेत्र का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित होंगे।

युवाओं की जिज्ञासा को सही दिशा देने की जरूरत

शुक्ला ने आज के बच्चों की जिज्ञासा और खुलेपन की सराहना की। उन्होंने कहा कि युवा बिना संकोच सवाल पूछते हैं और चुनौतीपूर्ण प्रश्न भी करते हैं। उनके अनुसार, इस गुण को प्रोत्साहित करने के साथ बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज बच्चों के सामने बहुत सारी संभावनाएं और संसाधन उपलब्ध हैं। अगर उन्हें यह समझने में मार्गदर्शन मिले कि किस चीज पर ध्यान केंद्रित करना है और किस दिशा में आगे बढ़ना है, तो वे उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

युवाओं से जिम्मेदारी लेने की अपील

शुभांशु शुक्ला ने युवाओं से दूसरों से बदलाव की उम्मीद करने के बजाय खुद जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को यह नहीं सोचना चाहिए कि देश को बदलना किसी और का काम है, बल्कि उन्हें इस भावना को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब युवा इस विचार को विकसित कर उस पर वास्तव में विश्वास करने लगेंगे, तो वे स्वाभाविक रूप से उसी दिशा में आगे बढ़ेंगे।

लखनऊ से शुरू हुई थी शुक्ला की यात्रा

अपने करियर की शुरुआत और लखनऊ से जुड़े अपने संबंधों का जिक्र करते हुए शुक्ला ने कहा कि उनकी यात्रा वास्तव में लखनऊ से शुरू हुई थी। ऐसे में शहर लौटना उनके लिए जीवन का एक चक्र पूरा होने जैसा है। उन्होंने कहा कि वह बच्चों के साथ अपनी कहानी साझा करेंगे और उन्हें यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि उनकी यात्रा भी उसी कक्षा से शुरू हुई थी, जिसमें वे आज बैठे हैं। उनके मुताबिक, अगर यह उनके लिए संभव हुआ, तो उनके लिए भी संभव है।

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से हुई थी मुलाकात

इससे पहले सितंबर में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात की थी। शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं। गोर ने कहा था कि शुक्ला की यात्रा भारत-अमेरिका के अंतरिक्ष सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि नासा में प्रशिक्षण से लेकर एक्सिओम स्पेस के एक्स-4 मिशन को संचालित करने तक शुक्ला की यात्रा द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग को दर्शाती है।

डीके शिवकुमार और रक्षा सहयोग पर भी गोर की चर्चा

गोर ने रविवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से भी मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, व्यापार और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में राजनयिक संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं। पिछले सप्ताह गोर ने लॉकहीड मार्टिन, रेथियॉन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच जैवलिन ऑल अप राउंड (एयूआर) के सह-उत्पादन से संबंधित संयुक्त परियोजना को द्विपक्षीय रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण प्रगति बताया था।

भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को बताया महत्वपूर्ण कदम

गोर ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर कहा था कि यह अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी के लिए बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि लॉकहीड मार्टिन, रेथियॉन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड का सहयोग अमेरिकी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा, अमेरिका के रक्षा-औद्योगिक आधार को मजबूत करेगा और भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देगा।

द सेकंड ऑर्बिट के जरिए यात्रा साझा करने की कोशिश

इससे पहले जुलाई में शुभांशु शुक्ला ने कहा था कि उनकी हाल ही में प्रकाशित पुस्तक द सेकंड ऑर्बिट उनकी यात्रा साझा करने और देशभर के लोगों को अंतरिक्ष एवं खगोल विज्ञान में रुचि लेने के लिए प्रेरित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा था कि विशाल देश में हर जगह शारीरिक रूप से जाना संभव नहीं है, इसलिए पुस्तक के जरिए अपनी यात्रा और अनुभव लोगों तक पहुंचाना एक तरीका है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि इससे अन्य लोगों को भी इस क्षेत्र में आगे आने, भाग लेने और राष्ट्र के लिए योगदान देने की प्रेरणा मिलेगी।

एस. सोमनाथ ने पुस्तक को यात्रा का दस्तावेज बताया

इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने कहा कि द सेकंड ऑर्बिट शुभांशु शुक्ला की यात्रा का दस्तावेजीकरण करती है। उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तक बताती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि के तहत एक्सिओम-4 मिशन कैसे संभव हो पाया। (Source: ANI)

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