मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रामपुर जेल से निकलते ही हिरासत में लिए गए मोहम्मद आजम खान को ED आज गाजियाबाद PMLA कोर्ट में पेश करेगी।
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम रविवार को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान को गाजियाबाद ले आई है। मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED उन्हें विशेष प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) कोर्ट में पेश करेगी।
रामपुर जेल से बाहर आते ही ED ने लिया हिरासत में
प्रवर्तन निदेशालय की लखनऊ जोनल टीम शनिवार (31 अक्टूबर) को रामपुर जिला जेल के बाहर पहले से मौजूद थी। धोखाधड़ी के मामले में जमानत मिलने के बाद आजम खान जैसे ही जेल से बाहर आए, ED अधिकारियों ने उन्हें तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया।
निदेशालय की यह कार्रवाई जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में हुए कथित वित्तीय घपले की जारी जांच के सिलसिले में हुई है।
सरकारी फंड की हेराफेरी का गंभीर आरोप
इससे पहले 13 अक्टूबर को ED अधिकारियों ने रामपुर जेल के अंदर ही आजम खान से लंबी पूछताछ की थी और उनका आधिकारिक बयान दर्ज किया था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि निजी ठेकेदारों के जरिए सरकारी ठेकों के फंड को डायवर्ट किया गया। इस राशि का इस्तेमाल मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की संपत्तियां बनाने में किया गया।
अगस्त में 10 ठिकानों पर हुई थी छापेमारी
इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 17 के तहत 19 अगस्त को ED ने बड़ी कार्रवाई की थी। तब उत्तर प्रदेश के रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली स्थित आजम खान से जुड़े करीब 10 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी।
साल 2006 में आजम खान द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर की एक प्रमुख निजी यूनिवर्सिटी है। ED के अनुसार, ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पाए गए हैं।
426 करोड़ की संपत्ति हाल ही में हुई अटैच
ED की इस कार्रवाई से कुछ ही दिन पहले, 28 अक्टूबर को एजेंसी ने जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को कुर्क (अटैच) कर लिया था।
जब्त की गई संपत्ति की सरकारी बुक वैल्यू 426 करोड़ रुपये है, जबकि बाजार में इसका अनुमानित मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये आंका गया है।
राजनीतिक सफर और कानूनी उलझनें
रामपुर सदर सीट से 10 बार विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे आजम खान समाजवादी पार्टी के सबसे असरदार मुस्लिम नेताओं में गिने जाते हैं। वे पिछले साल नवंबर से ही रंगदारी और जालसाजी के मामलों में जेल में बंद थे।
इसके अलावा, 2019 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में भी उन्हें दो साल की सजा सुनाई जा चुकी है।
(इनपुट: ANI)
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