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वन अपराध मामले में बैढ़न कोर्ट ने सुनाई सजा

11 साल पुराने वन अपराध मामले में दो प्रधान आरक्षक दोषी, बैढ़न कोर्ट ने सुनाई सजा और अर्थदंड

सिंगरौली के 11 वर्ष पुराने वन अपराध मामले में बैढ़न न्यायालय ने दो प्रधान आरक्षकों को दोषी ठहराते हुए सजा और अर्थदंड सुनाया। मामले में आगे विभागीय कार्रवाई पर भी निगाहें टिकी हैं।

11 साल पुराने वन अपराध मामले में दो प्रधान आरक्षक दोषी बैढ़न कोर्ट ने सुनाई सजा और अर्थदंड

Baidhan Court Convicts Two Head Constables in 11-Year-Old Forest Crime Case |

​सिंगरौली (मध्य प्रदेश)। करीब 11 वर्ष पुराने वन अपराध प्रकरण में बैढ़न न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने सरकारी महकमे में भारी हलचल मचा दी है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, बैढ़न ने पुलिस विभाग में पदस्थ प्रधान आरक्षक सूर्यमन साकेत एवं रामानंद शाह को वन अपराध के मामले में दोषी करार देते हुए सजा और अर्थदंड से दंडित किया है।

एक दशक लंबी सुनवाई के बाद सुनाई गई सजा

​वन परिक्षेत्र बरगवां द्वारा वर्ष 2013 में इस मामले को दर्ज किया गया था। एक दशक से अधिक समय तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद न्यायालय ने तमाम साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को पूरी तरह प्रमाणित माना। इसके बाद दोनों आरोपियों को मध्यप्रदेश वनोपज व्यापार (विनियमन) अधिनियम, 1969 की धारा 16 के तहत न्यायालय उठने तक की सजा तथा ₹10-10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया गया। 

अर्थदंड नहीं भरने पर कारावास का भी प्रावधान

अदालत के निर्देशानुसार, निर्धारित अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में तीन माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त, भारतीय वन अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन पर दोनों दोषियों पर ₹1-1 हजार का अतिरिक्त अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसकी राशि जमा न होने पर एक माह के अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान किया गया है।

दोषसिद्धि के बाद विभागीय कार्रवाई पर उठे सवाल

न्यायालय द्वारा पुलिस विभाग के कर्मचारियों को दोषी ठहराए जाने के बाद अब यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि क्या विभाग सेवा नियमों के अनुरूप इन पर कड़ी कार्रवाई करेगा। सेवा नियमों के जानकारों के अनुसार, आपराधिक दोषसिद्धि की स्थिति में सक्षम प्राधिकारी न्यायालय के निर्णय के आधार पर बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है, जिसमें सेवा से बर्खास्तगी तक का प्रावधान शामिल है। 

सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही की बनी बड़ी परीक्षा

अब यह प्रकरण केवल एक वन अपराध तक सीमित न रहकर सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही और विभागीय अनुशासन की एक बड़ी कसौटी बन चुका है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। 

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