बलिया में पॉक्सो एक्ट के गंभीर मामले में पुलिस की प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने 46 दिनों के भीतर आरोपी पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
बलिया (उत्तर प्रदेश)। जनपद में महिला सुरक्षा और त्वरित न्याय की दिशा में बलिया पुलिस ने एक ऐतिहासिक और कड़ा संदेश दिया है। पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग की प्रभावी पैरवी रंग लाई है। न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर मामले में महज 46 दिन के भीतर कलयुगी पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
सुखपुर थाना क्षेत्र की घटना
घटना थाना सुखपुरा क्षेत्र की है। 11 अप्रैल 2026 की रात को कलयुगी पिता विजय राम पुत्र सूबा राम ने अपनी ही सगी नाबालिक बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाया था। पीड़िता की शिकायत पर थाना सुखपुरा में त्वरित कार्रवाई करते हुए धारा 65(1), 115(2), 352 और धारा 5n/6 पाक्सो एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना किसी देरी के साक्ष्य संकलित किए और चार्जशीट न्यायलय में प्रेषित की।
अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा
विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट कोर्ट संख्या- 8 की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त विजय राम को दोषी करार दिया। कोर्ट ने धारा 06 पाक्सो एक्ट में अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना राशि अदा न करने पर अभियुक्त को एक वर्ष अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतना होगा।
ऑपरेशन कनविक्शन और अभियोजन की बड़ी सफलता
इस पूरे प्रकरण में बलिया पुलिस के मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन अधिकारी ADGC राकेश कुमार पांडेय द्वारा की गई मजबूत और प्रभावी पैरवी की चलते मात्र 46 दिनों के भीतर अदालत से फैसला सुनाया गया। यह फैसला उन अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है जो सोचते हैं कि कानूनी प्रक्रियाओं में लंबा वक्त लगता है। बलिया पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई समाज मे कानून का राज स्थापित करने और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को मजबूती दर्शाती है।
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