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बांधवगढ़ का हाथी पहुंचा यूपी

बांधवगढ़ का कॉलर वन हाथी पहुंचा यूपी, साथी हथिनी के साथ जंगलों में कर रहा विचरण

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अब हाथियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है, वहीं यहाँ का कॉलर वन हाथी यूपी पहुँच जाती है।

बांधवगढ़ का कॉलर वन हाथी पहुंचा यूपी साथी हथिनी के साथ जंगलों में कर रहा विचरण

Bandhavgarh's collared forest elephant reaches UP |

उमरिया (मध्य प्रदेश)। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अब सिर्फ बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि हाथियों के बढ़ते कुनबे के लिए भी पहचान बना रहा है। यहां करीब 70 से 80 हाथी स्थायी रूप से विचरण कर रहे हैं। इसी बीच बांधवगढ़ का एक रेडियो कॉलर हाथी अपनी साथी हथिनी के साथ मध्यप्रदेश की सीमा पार कर उत्तर प्रदेश पहुंच गया है। दोनों इन दिनों मिर्जापुर और प्रयागराज के जंगलों में विचरण कर रहे हैं।

हाथियों की संख्या लगातार बढ़ रही

वन विभाग रेडियो कॉलर के माध्यम से हाथी की लगातार निगरानी कर रहा है।बांधवगढ़ में वर्ष 2018 के बाद हाथियों ने स्थायी रूप से रहना शुरू किया था। समय के साथ इनकी संख्या बढ़ती गई। पहले इनका मूवमेंट बांधवगढ़ और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित रहता था, लेकिन अब हाथियों की आवाजाही दूसरे प्रदेशों तक पहुंचने लगी है।

फरवरी 2026 में कॉलर वन हाथी बांधवगढ़ की सीमा से बाहर निकला

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के अनुसार, उत्तर प्रदेश पहुंचे दो हाथियों में एक के गले में रेडियो कॉलर लगा है और उसके साथ एक हथिनी भी है। दोनों अगस्त के अंतिम सप्ताह में मध्यप्रदेश से उत्तर प्रदेश पहुंचे। इससे पहले फरवरी 2026 में कॉलर वन हाथी बांधवगढ़ की सीमा से बाहर निकला था। वह शहडोल पहुंचा और फिर सीधी होते हुए रीवा के जंगलों में चला गया। रीवा में लंबे समय तक उसका मूवमेंट बना रहा, जिसके बाद उसने मध्यप्रदेश की सीमा पार कर उत्तर प्रदेश का रुख किया।

रीवा में लंबे समय तक रही मौजूदगी

नवंबर 2024 में बांधवगढ़ में पहली बार इस हाथी को रेडियो कॉलर लगाया गया था। इसके बाद इसे ताला क्षेत्र में रिलीज किया गया और यह ताला, खे तथा मगधी क्षेत्र में विचरण करता रहा। इसी वजह से इसे ‘कॉलर वन’ नाम दिया गया। बाद में दिसंबर 2024 में दूसरे और 2 सितंबर 2025 को तीसरे हाथी को भी रेडियो कॉलर किया गया। रीवा में लंबे समय तक मौजूदगी के दौरान निगरानी आसान बनाने के लिए रेडियो कॉलर मॉनिटरिंग उपकरण वहीं उपलब्ध कराया गया था। अब प्रयागराज क्षेत्र में भी इसकी निगरानी की जा रही है। बांधवगढ़ से यूपी तक ‘कॉलर वन’ का सफर वन्यजीवों की लंबी दूरी तक प्राकृतिक आवाजाही का दिलचस्प उदाहरण बन गया है।

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