बाराबंकी में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हत्या के प्रयास के दोषी नन्द किशोर उर्फ नन्दू तिवारी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 60 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
बाराबंकी (उत्तर प्रदेश)। जनपद में जघन्य अपराधों में शामिल अभियुक्तों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हत्या के प्रयास के मामले में न्यायालय ने एक अभियुक्त को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 60 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। पुलिस की प्रभावी पैरवी और साक्ष्यों को मजबूती से प्रस्तुत किए जाने के बाद यह फैसला आया। पुलिस ने इसे अपराधियों को सजा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
नन्द किशोर उर्फ नन्दू तिवारी को हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट में सजा
पुलिस अधीक्षक रवीना त्यागी के निर्देशन में जघन्य अपराधों से संबंधित चिन्हित अभियोगों में गुणवत्तापूर्ण विवेचना, वैज्ञानिक विधि से साक्ष्य संकलन और न्यायालय में प्रभावी पैरवी की जा रही है। इसी क्रम में थाना कोठी में दर्ज हत्या के प्रयास के मुकदमे में अभियुक्त नन्द किशोर उर्फ नन्दू तिवारी पुत्र राजनरायण उर्फ रज्जू निवासी सेमरावां, थाना कोठी को दोषसिद्ध पाया गया। पुलिस के अनुसार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-10, बाराबंकी ने अभियुक्त को धारा 307 भारतीय दंड संहिता और धारा 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत दोषसिद्ध करते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा 60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
2015 में दर्ज हुआ था मुकदमा
मामले के अनुसार, चार जुलाई 2015 को थाना कोठी क्षेत्र के ग्राम रहीमपुर निवासी वीनू पत्नी गंगाराम ने अपने पति की जान लेने की नीयत से हमला किए जाने के संबंध में पुलिस को सूचना दी थी। शिकायत के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 101/2015 धारा 307 भादवि और 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किया गया। तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक संजीव कुमार सिंह ने साक्ष्य संकलित कर विवेचना पूरी की और अभियुक्त के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
पुलिस और अभियोजन टीम की रही भूमिका
मामले में एडीजीसी सुनील कुमार दुबे, मॉनीटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार यादव, उपनिरीक्षक अमर बहादुर सिंह सहित मॉनीटरिंग सेल के पुलिसकर्मियों और थाना कोठी के पैरोकार ने प्रभावी पैरवी में भूमिका निभाई। पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत इस अभियोग को जघन्य एवं सनसनीखेज अपराध के रूप में चिन्हित किया गया था।
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