लखनऊ में वाल्मीकि प्राकट्योत्सव पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन, रामायण और उनके आदर्शों पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती के अवसर पर सोमवार को लखनऊ में आयोजित वाल्मीकि प्राकट्योत्सव समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने महर्षि वाल्मीकि का व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण करते हुए भारतीय संस्कृति, साहित्य और समाज को दिशा देने में उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया। साथ ही महर्षि वाल्मीकि के जीवन, आदर्शों एवं महान कृतित्व पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और उसका अवलोकन किया।
रामायण भारतीय सभ्यता और संस्कृति का आधार
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन दर्शन सत्य, करुणा, सदाचार, सामाजिक समरसता और मानवता के शाश्वत मूल्यों का संदेश देता है। उनकी कालजयी रचना रामायण भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अमूल्य ग्रंथ है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज को मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, न्याय और लोककल्याण की प्रेरणा प्रदान करता रहा है।
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी प्राचीन काल में थीं। उनके आदर्शों को आत्मसात कर एक ऐसे समाज का निर्माण किया जा सकता है, जहां समानता, सद्भाव, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हो। महर्षि वाल्मीकि जी का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि ज्ञान, साधना और सकारात्मक विचारों के माध्यम से समाज को नई दिशा प्रदान की जा सकती है।
युवा पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का अनूठा प्रयास
समारोह के अंतर्गत आयोजित प्रदर्शनी में महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन, उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व, साहित्यिक योगदान और उनके द्वारा प्रतिपादित आदर्शों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी का उद्देश्य उनकी गौरवशाली विरासत से जनसामान्य को परिचित कराना तथा युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना रहा।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती का यह पावन अवसर उनके विचारों, आदर्शों और साहित्यिक विरासत को स्मरण करने के साथ-साथ उनके बताए मार्ग पर चलकर समरस, संस्कारित एवं मानवीय समाज के निर्माण का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि युगों तक महर्षि वाल्मीकि को याद रखा जाएगा। उनकी कृति रामायण हमें जीवन जीने का सच्चा तरीका बताती है।
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