यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। अयोध्या कोर्ट में आरोपियों की पेशी को लेकर सुरक्षा सख्त कर दी गई है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने सोमवार को अयोध्या के राम मंदिर में प्राप्त दान के कथित चोरी मामले में 'सख्त कार्रवाई' और 'निष्पक्ष जांच' का आश्वासन दिया है। डिप्टी सीएम ने साफ तौर पर कहा, ''हमारी सरकार सुनिश्चित करेगी कि पुलिस प्रशासन मामले की पूरी तरह निष्पक्ष जांच करे और दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कदम उठाए।''
आरोपियों की पेशी को लेकर अयोध्या अदालत में भारी सुरक्षा
डिप्टी सीएम का यह बयान मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों की निर्धारित अदालती पेशी से ठीक पहले आया है। इसे देखते हुए अयोध्या अदालत परिसर के भीतर और बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। इससे पहले, शुक्रवार को रिमांड मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपियों को सोमवार तक के लिए जेल भेज दिया था। आज की पेशी के बाद उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की उम्मीद है।
आरोपियों के बचाव को लेकर बार एसोसिएशन की बैठक
इस बीच, आरोपियों को कानूनी प्रतिनिधित्व (वकील) देने या न देने को लेकर अयोध्या बार एसोसिएशन और फैजाबाद एडवोकेट्स एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई। अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने बताया, ''वकील इस बात पर विचार-विमर्श करेंगे कि आरोपियों का बचाव करना है या नहीं। इस बात की पूरी संभावना है कि एडवोकेट्स एसोसिएशन मंदिर और उसके हितों के पक्ष में फैसला करेगी और आरोपियों के इस कृत्य की कड़ी निंदा करेगी।'' सुरक्षा कारणों से प्रशासन और वकील संगठन दोनों ही जेल से वर्चुअल माध्यम द्वारा सुनवाई आयोजित करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्या है पूरा मामला और किस पर दर्ज हुई FIR?
अयोध्या से पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक पवन पांडे के राम मंदिर के दान में करीब 5 करोड़ से 7 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाए जाने के बाद यह मामला गरमाया था। इसके बाद, श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने 14 जून को मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया। इसी सिलसिले में 25 जून को BNS की धाराओं के तहत एक एफआईआर दर्ज की गई। इसमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, तिन्नू यादव, मनीष यादव और कुछ अन्य लोगों को नामजद किया गया है। एसआईटी की जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस मुद्दे ने उत्तर प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, जहां सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी दल मंदिर के वित्तीय प्रबंधन को लेकर आमने-सामने हैं।