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भोपाल में नरवाई जलाई तो गिरेगी गाज, सैटेलाइट से निगरानी होगी और लगेगा जुर्माना

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासन ने नरवाई (गेहूं की कटाई के बाद बचे अवशेष) जलाने वालों के...

भोपाल में नरवाई जलाई तो गिरेगी गाज सैटेलाइट से निगरानी होगी और लगेगा जुर्माना

भोपाल में नरवाई जलाई तो गिरेगी गाज, सैटेलाइट से निगरानी होगी और लगेगा जुर्माना |

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासन ने नरवाई (गेहूं की कटाई के बाद बचे अवशेष) जलाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियम तोड़ने वाले किसानों को अब बख्शा नहीं जाएगा। भोपाल में गेहूं की कटाई के बाद नरवाई जलाने पर पहले से ही तीन महीने का प्रतिबंध लगा हुआ है, जिसका उल्लंघन करने वालों पर अब कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सैटेलाइट से होगी निगरानी

प्रशासन अब खेतों में नरवाई जलाने वाली घटनाओं को पकड़ने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। सैटेलाइट के माध्यम से खेतों की पहचान की जाएगी, जिससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस स्थान पर आग लगाई गई है।

​100 किसानों पर कार्रवाई की तैयारी

एसडीएम विनोद सोनकिया और आशुतोष शर्मा को नरवाई जलाने की कई शिकायतें मिली हैं। प्रशासन इन शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है और 100 से अधिक चिन्हित किसानों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।

पटवारियों को दिये गये निर्देश

एसडीएम द्वारा सभी पटवारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में नरवाई जलाने वाले खेतों का रिकॉर्ड तैयार करें। इसके बाद 'खसरा' (भूमि रिकॉर्ड) की मदद से संबंधित किसानों के नाम और विवरण जुटाए जाएंगे।

​भारी जुर्माना की तैयारी व कानूनी कार्यवाही भी

प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर न केवल भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उन पर कानूनी दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

इसलिए लगाया गया है प्रतिबंध

खेतों में नरवाई जलाने से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचता है, जिससे वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। इसके अलावा, आग लगने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और खेतों में मौजूद मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं। इन दुष्प्रभावों को रोकने के लिए ही प्रशासन ने गेहूं कटाई के बाद के 3 महीनों के लिए नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है।

​जलाने की बजाए खाद बनाएं

प्रशासन ने सभी किसानों से अनुरोध किया है कि वे नरवाई जलाने के बजाय उसे खाद बनाने, मल्चिंग या पशुओं के चारे के रूप में उपयोग करें ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और वे किसी भी कानूनी कार्रवाई से बच सकें।

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