नई दिल्ली। केन्द्र ने 4 साल बाद देश में गेहूं की कीमतें सहारा देने के लिए 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी।
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने देश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध गेहूं के स्टाक और मांग में गिरावट को देखते हुए निर्यात नीति में संशोधन करते हुए 25 लाख टन गेहूं और पांच लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति प्रदान की है। केन्द्र ने लगभग चार साल बाद यह मंजूरी देश में गेहूं की कीमतों को सहारा देने के लिए दी है। केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने इस संबध में अधिसूचना जारी कर दी है। केंद्र सरकार ने गेहूं की निर्यात नीति में आंशिक संशोधन करते हुए 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं के निर्यात को विशेष अनुमति प्रदान की है। केन्द्र ने यह फैसला इसी महीने की शुरुआत में ले लिया था। लेकिन इस संबंध में महानिदेशालय विदेशी व्यापार (DGFT) ने औपचारिक रूप से मंगलवार को नोटिफिकेशन जारी किया।
केन्द्र ने 25 लाख टन गेहूं निर्यात मंजूर
केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने बताया कि यह फैसला वर्तमान उपलब्धता और कीमतों की स्थिति का व्यापक आकलन करने के बाद लिया गया है, ताकि किसानों के हितों की रक्षा की जा सके। मंत्रालय ने बताया कि 2025-26 के दौरान निजी क्षेत्र के पास गेहूं का स्टॉक लगभग 75 लाख टन है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 32 लाख टन अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि देश में आपूर्ति की स्थिति संतोषजनक है। 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (FCI) के केंद्रीय भंडार में कुल गेहूं उपलब्धता लगभग 182 लाख टन रहने का अनुमान है। मंत्रालय के अनुसार, इससे यह सुनिश्चित होता है कि निर्यात की अनुमति से देश की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने औपचारिक अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि गेहूं की निर्यात की अनुमति दिये जाने के बावजूद गेहूं अभी भी निर्यात नीति में ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में बना रहेगा। गेहूं की तय मात्रा में निर्यात की ये अनुमति विशेष छूट के अन्तर्गत प्रदान की गई है। देश में गेहूं की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने गेहूं की कीमतों को गिरने से रोकने के लिए निर्यात की अनुमति दी है। केन्द्र ने विशेष परिस्थितियों को देख 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं के निर्यात की विशेष अनुमति दे दी है। इस संबंध में सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमति विदेशी व्यापार नीति, 2023 और विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के तहत दी गई है। साथ ही, 13 मई 2022 की पूर्व अधिसूचना में निर्धारित शर्तें यथावत लागू रहेंगी। अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत सरकार अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, संबंधित सरकारों के अनुरोध पर 25 लाख मीट्रिक टन की निर्धारित सीमा से अतिरिक्त निर्यात की अनुमति भी दे सकती है।
सीमित गेहूं निर्यात से किसानों को लाभ
डीजीएफटी के अनुसार, निर्यात से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइंस अलग से जारी की जाएंगी। साथ ही गेहूं के आटे और उससे बने उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेगा। हालांकि, अतिरिक्त 5 लाख टन गेहूं का आटा और संबंधित उत्पादों के निर्यात को भी विशेष अनुमति दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सरकार को घरेलू महंगाई और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है। सीमित निर्यात से एक ओर किसानों को बेहतर रिटर्न मिलेगा, तो दूसरी ओर घरेलू बाजार में कीमतों पर नियंत्रण भी बना रहेगा। आगामी रबी सीजन की आवक को देखते हुए यह निर्णय गेहूं उत्पादक राज्यों के किसानों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है।
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