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‘लव जिहाद’ पर बाल अधिकार संगठन की दो टूक..

‘लव जिहाद’ पर बाल अधिकार संगठन की दो टूक

भोपाल। लव जेहाद की उपज रही समस्या के समाधान के लिए समाज और परिवार को एक पहलू में देखना, समझना होगा।

‘लव जिहाद’ पर बाल अधिकार संगठन की दो टूक

‘लव जिहाद’ पर बाल अधिकार संगठन की दो टूक |

भोपाल। लव जेहाद की उपज रही समस्या के समाधान के लिए समाज और परिवार को एक पहलू में देखना, समझना होगा।  संगठन ने कहा, कई मामलों में समस्या की जड़ घर के भीतर संवाद की कमी और भावनात्मक दूरी होती है।एक कार्यक्रम के दौरान बाल अधिकार संगठन की प्रमुख ने कहा कि जब परिवार में बच्चों, विशेषकर बेटियों से खुलकर बातचीत नहीं होती तो वे भावनात्मक रूप से असुरक्षित महसूस करने लगती हैं।

ऐसे में बाहरी प्रभाव उन्हें गलत दिशा में ले जा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी समस्या का समाधान डर या दबाव नहीं, बल्कि समझ और संवाद से निकलता है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि माता-पिता को चाहिए कि वे अपनी बेटियों की बात धैर्यपूर्वक सुनें, उनके विचारों और भावनाओं को महत्व दें और सही-गलत के बीच फर्क समझाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। संवादहीनता बच्चों को अकेला कर देती है, जिससे वे आसानी से बहकावे में आ सकते हैं।

बाल अधिकार संगठन ने यह भी कहा कि समाज को चाहिए कि वह हर मामले को धार्मिक या राजनीतिक रंग देने के बजाय सामाजिक और पारिवारिक दृष्टिकोण से देखे। मजबूत परिवार, संवेदनशील माता-पिता और भरोसे का माहौल ही बच्चों को सुरक्षित रख सकता है। अंत में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि बेटियों की सुरक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि घर में प्रेम, विश्वास और खुली बातचीत से सुनिश्चित की जा सकती है। यही एक स्वस्थ और सशक्त समाज की नींव है।

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