मझगांय बांध के बढ़ते जलस्तर और विस्थापन की समस्याओं को लेकर ग्रामीणों का 'चिता आंदोलन' दूसरे दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि पात्र परिवारों को मुआवजा नहीं मिला है।
पन्ना: मझगांय बांध के डूब क्षेत्र में बढ़ते जलस्तर और विस्थापन की समस्याओं को लेकर जय किसान संगठन के नेतृत्व में चल रहा 'चिता आंदोलन' दूसरे दिन भी जारी रहा। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने मुआवजा, पुनर्वास और पात्र परिवारों के अधिकारों की मांग उठाई।
बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि बांध का पानी लगातार गांवों की ओर बढ़ रहा है। कई घरों में पानी पहुंचने लगा है। उनका आरोप है कि कई पात्र परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, जबकि मुआवजा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पैसों की मांग की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। अमित भटनागर ने कहा कि पानी लगातार बढ़ रहा है और लोग अपने घर-खेत डूबते देख रहे हैं, लेकिन प्रशासन की संवेदनशीलता नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, जिसके चलते ग्रामीणों को चिता आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
मुआवजे और पुनर्वास की मांग तेज
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आंदोलन के पहले दिन वनहरी के टपरियन गांव की बिजली काट दी गई। ग्रामीणों ने इसे आंदोलनकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश बताते हुए बिजली व्यवस्था तत्काल बहाल करने की मांग की। आंदोलन के दूसरे दिन जिला कांग्रेस के नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पहुंचकर ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया। कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पर भी सवाल उठाए। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में लंबित मुआवजे का तत्काल भुगतान, पारदर्शी सर्वे, उचित पुनर्वास और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच शामिल है। नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
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