कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने BRICS समिट, भारत-चीन संबंध और कांग्रेस की रणनीति पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा BRICS देशों से संप्रभुता के सम्मान और आपसी विवाद बातचीत से सुलझाने की अपील की।
सहारनपुर: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने BRICS समिट को लेकर कहा कि दिल्ली डिक्लेरेशन के बाद भारत की विदेश नीति और डिप्लोमेसी को लेकर पिछले दिनों जो डेंट लगा था, उसकी काफी हद तक रिपेयरिंग हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि BRICS देशों द्वारा किए गए डिक्लेरेशन पर कितनी मजबूती से कायम रहा जाता है। इमरान मसूद ने कहा कि सभी BRICS देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।
भारत-चीन विवाद बातचीत से सुलझाने पर जोर
भारत और चीन के बीच जो कॉन्फ्लिक्ट हैं, उन्हें बातचीत और समाधान के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे BRICS और मजबूत होगा और तेजी से बन रहे नए वर्ल्ड ऑर्डर में BRICS की महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई देगी। कांग्रेस सांसद ने BRICS को आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि BRICS देशों के पास विश्व की बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है, साथ ही बड़ी वर्कफोर्स भी इन देशों के पास है। ऐसे में BRICS का मजबूत होना एक अच्छा कदम है और इसका भविष्य बेहतर हो सकता है।
अपनी जीत के लिए एकजुट हों: इमरान मसूद
बुलंदशहर में हुई विजय संकल्प रैली में दिए गए अपने बयान को लेकर इमरान मसूद ने कहा कि किसी को हराने के लिए एकजुट होने की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और लोगों को अपनी जीत के रास्ते तलाशने चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के मौजूदा हालात के बीच कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में मजबूती के साथ लड़ रही है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि लोगों को यह तय करना होगा कि उन्हें राहुल गांधी का हाथ पकड़कर और कांग्रेस का झंडा थामकर आगे बढ़ना है या नहीं।
आकाश आनंद मामले पर बोले इमरान मसूद
आकाश आनंद और उनके छोटे भाई को फिर से पार्टी से बाहर किए जाने के सवाल पर इमरान मसूद ने कहा कि यह उनकी पार्टी का अंदरूनी मामला है और कांग्रेस का इससे कोई लेना-देना नहीं है। सहारनपुर के मस्जिद प्रकरण के हाईकोर्ट पहुंचने और जुर्माने पर स्टे मिलने के सवाल पर कांग्रेस सांसद ने कहा कि मामला अब हाईकोर्ट में है। कोर्ट में दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर ही सुनवाई होगी। इमरान मसूद ने कहा कि कोर्ट के अंदर पेपर और डॉक्यूमेंट्स के आधार पर बात होगी। उन्होंने दावा किया कि अगर दस्तावेजों में मामला टिक नहीं पाया तो उसका असर सुनवाई में दिखाई देगा।
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