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सीजेपी परिवार की वित्तीय जांच की मांग

सीजेपी संस्थापक के परिवार की वित्तीय जांच की मांग, अमेरिकी शिक्षा खर्च और फंडिंग पर उठे सवाल

सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके के वित्तीय मामलों की औपचारिक जांच की मांग की है।

सीजेपी संस्थापक के परिवार की वित्तीय जांच की मांग अमेरिकी शिक्षा खर्च और फंडिंग पर उठे सवाल

CJP Funding, Expenses Under Scrutiny |

सूरत (गुजरात): सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके के वित्तीय मामलों की औपचारिक जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि एक जूनियर इंजीनियर (जेई) के वेतन से उनके बेटे की अमेरिका में उच्च शिक्षा का खर्च कैसे उठाया जा सकता है।

ईसीआई और सीबीआईसी से की शिकायत

कार्यकर्ता ने सीजेपी की कानूनी स्थिति और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए 1 करोड़ रुपये के फंड पर कर देयता के संबंध में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) से भी संपर्क किया है। गुरुवार को एएनआई से बात करते हुए तिवारी ने बताया कि उन्होंने तीन अलग-अलग जगहों पर शिकायतें दर्ज कराई हैं। तिवारी ने कहा, "मैंने तीन अलग-अलग जगहों पर शिकायत दर्ज कराई है। मैंने ईसीआई में सीजेपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए 1 करोड़ रुपये के फंड के संबंध में, मैंने सीबीआईसी (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड) से शिकायत की है कि इस पर 18% जीएसटी लगाया जाए।"

पिता की संपत्ति की जांच की मांग

उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र सरकार को भगवानराव दिपके की वित्तीय संपत्तियों की जांच की मांग करते हुए एक शिकायत सौंपी गई है। तिवारी का दावा है कि भगवानराव दिपके महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) में जूनियर इंजीनियर थे। उन्होंने कहा, "मैंने महाराष्ट्र सरकार से शिकायत की है कि भगवानराव दिपके एमआईडीसी में जूनियर इंजीनियर थे। अगर उन्हें 60,000–65,000 रुपये का वेतन मिलता था, तो वे अमेरिका में अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च कैसे उठा पाए? इसकी जांच होनी चाहिए और यदि यह अनुपातहीन संपत्ति का मामला है तो सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।"

सीजेपी की कानूनी स्थिति पर सवाल

सीजेपी के खिलाफ अपनी शिकायत में तिवारी ने आरोप लगाया कि संगठन राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत न होने के बावजूद चंदा स्वीकार कर रहा था। उन्होंने कहा, "अगर वे एक राजनीतिक दल की तरह काम कर रहे हैं और चंदा लेते हैं, लेकिन पंजीकृत नहीं हैं, तो उन्हें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकरण कराना होगा। हमने मांग की है कि उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए क्योंकि वे पंजीकृत नहीं हैं, लेकिन 1 करोड़ रुपये का चंदा स्वीकार कर रहे हैं।"

विरोध प्रदर्शनों पर भी जताई आपत्ति

तिवारी ने सीजेपी के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों की भी आलोचना करते हुए कहा कि यह आंदोलन शुरू में नीट पेपर लीक मुद्दे पर केंद्रित था, लेकिन बाद में इसकी दिशा बदल गई। उन्होंने कहा, "हम अपने बड़ों का सम्मान करते हैं। जब तक आप सीजेपी आंदोलन चला रहे थे और नीट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब तक सब ठीक था। लेकिन आंदोलन के बीच में आपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं। विदेशी नेताओं से उनके संबंधों पर भी आपत्तिजनक बयान दिए गए। हमने इन सभी मामलों में शिकायत दर्ज कराई है। यह सब गलत है।"

(एएनआई)

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