लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी के प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष बी प्रभाकरन और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को कुरनूल जिले में जोन्नागिरी स्वर्ण खदान का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।
CM Naidu Inaugurates India's First Private Commercial Gold Mine in Andhra Pradesh |
कुरनूल (आंध्र प्रदेश)। लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी के प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष बी प्रभाकरन और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को कुरनूल जिले में जोन्नागिरी स्वर्ण खदान का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। यह भारत में स्वतंत्रता के बाद पहली बार वाणिज्यिक पैमाने पर निजी क्षेत्र के स्वर्ण खनन की शुरुआत है।
₹400 करोड़ की परियोजना से घरेलू सोना उत्पादन को नई ताकत
कंपनी की एक विज्ञप्ति के अनुसार, तुग्गली मंडल के जोन्नागिरी, एर्रागुडी और पागीदिरायि गांवों में स्थित यह खदान भारत की घरेलू सोना उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब देश इस कीमती धातु के दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक बना हुआ है। जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित और लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी तथा त्रिवेनी समूह द्वारा समर्थित इस परियोजना में ₹400 करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है और यह लगभग 598 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है।
भारत की सोना आयात निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ा कदम
प्रेस रिलीज़ के अनुसार, इस खदान से पूरी क्षमता पर हर साल 1,000 किलोग्राम तक रिफ़ाइंड सोना मिलने की उम्मीद है। इसकी अनुमानित कामकाजी अवधि लगभग 15 साल है। अभी सर्टिफ़ाइड गोल्ड रिसोर्स लगभग 13.1 टन हैं, जबकि चल रही खोज से बड़े मिनरलाइज़्ड बेल्ट में और ज़्यादा रिसोर्स मिलने की संभावना का संकेत मिलता है। भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्रति वर्ष 700 से 1,000 टन सोने का आयात करता है। कंपनी ने कहा कि जोन्नागिरी प्रोजेक्ट से कमर्शियल स्तर पर सोने के उत्पादन पर फिर से ध्यान देने में मदद मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिशों को बढ़ावा मिलेगा।
बी प्रभाकरन ने कहा- भारत में स्वर्ण खनन के नए युग की शुरुआत
उद्घाटन समारोह में बोलते हुए प्रभाकरण ने कहा, "जॉन्नागिरी गोल्ड माइन भारत के गोल्ड माइनिंग उद्योग के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। दशकों से, भारत सोने का दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता रहा है और साथ ही आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर भी रहा है। आज हम यह दिखा रहे हैं कि भारत कमर्शियल स्तर पर वर्ल्ड-क्लास गोल्ड माइनिंग एसेट्स की खोज, विकास और संचालन कर सकता है।"
आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता गोल्ड माइनिंग इकोसिस्टम
उन्होंने आगे कहा, "हमारा विज़न सिर्फ़ एक प्रोजेक्ट से कहीं आगे का है। हमारा मकसद देश में सोने का एक ऐसा सस्टेनेबल इकोसिस्टम बनाना है जो आर्थिक विकास को बढ़ावा दे, रोज़गार पैदा करे, देश की रिसोर्स सिक्योरिटी में योगदान दे और 'मेड इन इंडिया' रिफ़ाइंड सोने को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में स्थापित करे। देश में विश्व-स्तर पर प्रतिस्पर्धी गोल्ड माइनिंग एसेट्स का पोर्टफोलियो बनाने की दिशा में 'आत्मनिर्भर भारत' का एक सच्चा उदाहरण है जोन्नागिरी।"
रोज़गार और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना का उद्घाटन ऐसे समय में हुआ है जब सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। कंपनी ने कहा कि भारत के लिए सोने के घरेलू स्रोत का विकास व्यावसायिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। विज्ञप्ति के अनुसार, इस परियोजना से रोजगार के अवसर पैदा होने, स्थानीय व्यवसायों को समर्थन मिलने और निवेश, रॉयल्टी और करों के माध्यम से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान मिलने की उम्मीद है।
आंध्र प्रदेश में गोल्ड हब बनने की संभावनाएं तेज
इस खदान से भारत के गोल्ड सेक्टर में और ज़्यादा खोज और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रिलीज़ में कहा गया है कि इस इलाके में खोज की अतिरिक्त गतिविधियां चल रही हैं, जिससे आंध्र प्रदेश के एक प्रमुख गोल्ड-प्रोड्यूसिंग राज्य के तौर पर उभरने की अच्छी संभावना है। कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने के साथ, जोन्नागिरी गोल्ड माइन से भारत की घरेलू गोल्ड वैल्यू चेन के मज़बूत होने और "मेड इन इंडिया" गोल्ड को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाने के विज़न को समर्थन मिलने की उम्मीद है। (Source: ANI)
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