राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध संचालक द्वारा जारी किए गए एक आदेश के बाद संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों में आक्रोश की लहर दौड़ गई है।
शाजापुर (मध्य प्रदेश)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध संचालक द्वारा जारी किए गए एक आदेश के बाद संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। मिशन संचालक द्वारा जारी इस आदेश को कर्मचारियों ने पूरी तरह से "दमनकारी" करार दिया है। इस आदेश में हड़ताल पर चल रहे कर्मचारियों को तुरंत काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है, साथ ही यह साफ चेतावनी भी दी गई है कि यदि कर्मचारी अपनी हड़ताल जारी रखते हैं, तो उन्हें नौकरी से निष्कासित कर दिया जाएगा।
आदेश को बताया लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला
प्रशासन के इस धमकी भरे आदेश के सामने आते ही संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, शाजापुर के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राजपूत के नेतृत्व में तमाम कर्मचारियों ने इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन के पदाधिकारियों और प्रमुख सदस्यों ने इस कदम को कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। विरोध जताने वालों में मुख्य रूप से अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राजपूत के साथ शैलेंद्र सोनी, अशोक जायसवाल, मसानिया जी, अरुण वर्मा, आशुतोष मेहता, सुमन राठौर, यास्मीन खान और सोनू सिंह सहित बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी शामिल रहे।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि प्रशासन संवाद के जरिए उनकी जायज मांगों को पूरा करने के बजाय डराने-धमकाने की राजनीति पर उतर आया है। नौकरी से निकालने की धमकी देकर कर्मचारियों के हौसलों को तोड़ा नहीं जा सकता। यह आदेश पूरी तरह से तानाशाही पूर्ण है। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वे इस तरह की धमकियों से डरकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, उनका यह संघर्ष और उग्र रूप से जारी रहेगा। इस दमनकारी आदेश के बाद से कर्मचारियों में एकजुटता और अधिक बढ़ गई है।
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