MP News : भोपाल। पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) में अब अलग विषय से पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को CUET परीक्षा के माध्यम से ही प्रवेश लेना होगा।
MP News : भोपाल। पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) में अब अलग विषय से पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को CUET परीक्षा के माध्यम से ही प्रवेश लेना होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा CUET-2026 को लेकर अधिसूचना जारी किए जाने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने मप्र के सभी कॉलेजों को इस नई व्यवस्था के अनुसार तैयारी के निर्देश दिए हैं। हालांकि, नियम स्पष्ट होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।
नई व्यवस्था यह है
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यदि कोई छात्र स्नातक (UG) में किसी एक विषय से पढ़ाई कर चुका है और पीजी में किसी अन्य विषय में प्रवेश चाहता है तो उसे संबंधित विषय की CUET परीक्षा पास करनी होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी छात्र ने स्नातक में गणित या भौतिकी पढ़ी है और वह पीजी में रसायन शास्त्र करना चाहता है, तो उसे CUET के माध्यम से योग्यता सिद्ध करनी होगी।
1. परीक्षा स्तर को लेकर असमंजस
अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि CUET परीक्षा किस स्तर की होगी—विश्वविद्यालय स्तर पर या राष्ट्रीय स्तर पर। साथ ही, यह भी तय नहीं है कि किन विषयों में परीक्षा होगी और किनमें नहीं,। इशस इससे छात्रों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
2. सभी विश्वविद्यालय शामिल नहीं
देशभर में अभी भी कई राज्य विश्वविद्यालय CUET प्रणाली से नहीं जुड़े हैं। मध्यप्रदेश में भी सभी विश्वविद्यालयों ने CUET को पूरी तरह लागू नहीं किया है। ऐसे में छात्रों के सामने यह सवाल खड़ा हो रहा है कि वे CUET देकर प्रवेश आखिर किन संस्थानों में ले सकेंगे।
सूचना की कमी से बढ़ी दिक्कत
यह प्रावधान शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू माना जा रहा है, लेकिन विभाग की ओर से समय रहते विस्तृत दिशानिर्देश सार्वजनिक नहीं किए गए। नतीजतन, कई छात्र CUET में शामिल ही नहीं हो सके। अब विभाग इस पर पुनर्विचार और अंतरिम व्यवस्था पर विचार कर रहा है।
कॉलेजों को निर्देश, लेकिन तैयारी अधूरी
उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों को छात्रों को CUET-आधारित प्रवेश के लिए मार्गदर्शन देने को कहा है, लेकिन पाठ्यक्रम, परीक्षा पैटर्न और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर अभी भी स्पष्ट गाइडलाइन का इंतजार है। यह नई व्यवस्था उच्च शिक्षा में लचीलापन तो लाती है, लेकिन समय पर स्पष्टता और समन्वय न होने से छात्रों की परेशानी बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
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