भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पीने के पानी की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पीने के पानी की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है। शहर के भूजल (Groundwater) में जानलेवा ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया की पुष्टि होने के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है।
भोपाल और इंदौर में जल संकट
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब भोपाल के भूजल में भी ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम द्वारा पानी की जांच के लिए 'अकुशल कर्मचारियों' का सहारा लिया जा रहा है, जिस पर NGT ने आपत्ति जताई है। NGT ने सरकार से इस मामले में तत्काल 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (Action Taken Report) पेश करने को कहा है।
सीवरेज का पानी, पीने के पानी में मिलने से फैलता है
हाल ही में किए गए जल नमूनों की जांच में भोपाल के कई इलाकों के ट्यूबवेल और हैंडपंपों में ई-कोलाई बैक्टीरिया के अंश मिले हैं। यह बैक्टीरिया आमतौर पर सीवेज का पानी पीने के पानी की पाइपलाइनों या भूजल में मिलने के कारण फैलता है।
NGT की सेंट्रल बेंच ने स्वत: संज्ञान लिया
NGT की सेंट्रल बेंच ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि यह जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब मामला इतना गंभीर है, तो विशेषज्ञ टीमों के बजाय अकुशल कर्मचारियों से जांच क्यों कराई जा रही है?
स्वास्थ्य को यह खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, ई-कोलाई बैक्टीरिया से दूषित पानी पीने से गंभीर डायरिया और पेट में मरोड़ के साथ किडनी फेलियर का खतरा (HUS) के साथ उल्टी और तेज बुखार रहता है।
प्रशासन ने की कार्रवाई
NGT की फटकार के बाद प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में हैंडपंपों पर "सावधान! यह पानी पीने योग्य नहीं है" के चेतावनी बोर्ड लगाने शुरू कर दिए हैं। साथ ही, कुछ इलाकों में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खानों (Slaughterhouses) को भी सील किया गया है, जिन्हें इस प्रदूषण का एक संभावित स्रोत माना जा रहा है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल निगम द्वारा सप्लाई किए गए और फिल्टर/उबले हुए पानी का ही सेवन करें। असुरक्षित जल स्रोतों का उपयोग जानलेवा हो सकता है।
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