MP News : जबलपुर। मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर दायर याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट रुख रखने को कहा है।
MP News : जबलपुर। मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर दायर याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट रुख रखने को कहा है। गुरुवार को हुई लंबी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संकेत दिए कि यह मामला लाखों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसका शीघ्र निराकरण किया जाएगा।
राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक के कारण प्रदेश में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। वर्तमान स्थिति में करीब तीन लाख पद रिक्त हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। सरकार ने अदालत को बताया कि प्रदेश में कुल 9.50 लाख पद स्वीकृत हैं, जिनमें से लगभग 6.45 लाख पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रमोशन पर लगी रोक के चलते वर्ग-2 और वर्ग-4 के लगभग 2.90 लाख कर्मचारियों की पदोन्नति लंबे समय से अटकी हुई है।
कोर्ट ने पूछे अहम सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से यह जानना चाहा कि क्या प्रमोशन में आरक्षण से वास्तव में किसी विभाग में असंतुलन या भेदभाव हुआ है। कोर्ट ने उदाहरण के तौर पर पशुपालन, चिकित्सा शिक्षा, वन और औद्योगिक विभागों का उल्लेख करते हुए ठोस तथ्य प्रस्तुत करने को कहा।
जल्द फैसला देने का संकेत
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि यह विषय लंबे समय से लंबित है और इसका असर सरकारी सेवाओं की कार्यक्षमता पर पड़ रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनिश्चितता की स्थिति को ज्यादा समय तक नहीं खींचा जाएगा।
अगली सुनवाई 6 जनवरी को
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी तय की है। उम्मीद की जा रही है कि इसके बाद प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े इस विवाद पर कोई ठोस दिशा निकल सकती है।यह मामला न सिर्फ कर्मचारियों के कैरियर से जुड़ा है, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
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