दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को नताशा नरवाल को अकादमिक सम्मेलन में शामिल होने और शोध कार्य के लिए ब्रिटेन जाने की अनुमति दे दी। वह 2 नवंबर से 1 दिसंबर 2026 तक ब्रिटेन में रहेंगी।
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को नताशा नरवाल को अकादमिक सम्मेलन में शामिल होने और शोध कार्य के लिए ब्रिटेन जाने की अनुमति दे दी। वह 2 नवंबर से 1 दिसंबर 2026 तक ब्रिटेन में रहेंगी। नताशा 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े तीन मामलों में आरोपी हैं। अदालत ने उन्हें कुछ शर्तों के अधीन विदेश यात्रा की अनुमति दी है। न्यायमूर्ति अमित बंसल ने नताशा नरवाल के वकील आदित एस. पुजारी की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने निर्देश दिया कि उन्हें प्रत्येक मामले में 50,000 रुपये की जमानत राशि जमा करनी होगी। विदेश यात्रा के लिए अनुमति निर्धारित शर्तों के पालन के अधीन दी गई है।
पीएचडी शोध और वार्षिक सम्मेलन में लेंगी हिस्सा
नताशा नरवाल के वकील ने अदालत को बताया कि वह वारविक विश्वविद्यालय में पीएचडी कर रही हैं और कारागार श्रम से संबंधित विषय पर शोध कर रही हैं। उनका शोध पत्र लंदन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (एसओएएस) में आयोजित होने वाले 23वें वार्षिक ऐतिहासिक भौतिकवाद सम्मेलन के लिए चुना गया है। यह सम्मेलन 5 से 8 नवंबर तक आयोजित होगा। नताशा इसमें 'सामाजिक पुनरुत्पादन के रूप में लैंगिक कारागार श्रम' शीर्षक से अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगी। उनकी प्रस्तावित यात्रा में अकादमिक शोध से जुड़े अन्य कार्य भी शामिल हैं। नताशा की याचिका का अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने विरोध किया। एसवी राजू ने दलील दी कि ब्रिटेन के प्रत्यर्पण कानून सख्त हैं और यदि नताशा वापस नहीं लौटती हैं, तो उन्हें भारत वापस लाना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नताशा तीन साल का पाठ्यक्रम ऑनलाइन कर रही हैं, इसलिए अकादमिक उद्देश्यों के लिए ब्रिटेन जाना आवश्यक नहीं है। वहीं, मधुकर पांडे ने आशंका जताई कि यदि वह वापस नहीं लौटतीं और ब्रिटेन में शरण मांगती हैं, तो क्या स्थिति होगी।
ट्रायल कोर्ट ने पहले खारिज कर दी थी याचिका
नताशा नरवाल ने 6 अक्टूबर को ट्रायल कोर्ट द्वारा उनकी विदेश यात्रा की अर्जी खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। उन्होंने 2 नवंबर से 1 दिसंबर तक ब्रिटेन जाने की अनुमति मांगी थी। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि विदेश यात्रा का अधिकार पूर्ण नहीं है और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत लंबित कार्यवाही इस अनुरोध पर फैसला लेते समय प्रासंगिक है। अदालत ने यह भी ध्यान दिया था कि मामला आरोपों पर विचार के चरण में है और संबंधित अपराधों में गंभीर सजा का प्रावधान है। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने यह स्वीकार किया था कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने से किसी आरोपी को विदेश यात्रा से स्वतः वंचित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, आरोपों की प्रकृति और गंभीरता तथा मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उसने उस समय अनुमति देना उचित नहीं समझा था।
हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से भी मांगा था जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को नताशा नरवाल की याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था। इस याचिका में उन्होंने अकादमिक सम्मेलन में भाग लेने और संबंधित शोध करने के लिए ब्रिटेन जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। अब हाईकोर्ट ने उन्हें निर्धारित शर्तों के साथ यात्रा की अनुमति दे दी है, जिससे वह अपने शोध पत्र को प्रस्तुत करने और अकादमिक कार्यों में भाग लेने के लिए ब्रिटेन जा सकेंगी।
[एएनआई]
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