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शिव शक्ति मंदिर के विध्वंस नोटिस पर रोक

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेताजी नगर स्थित 50 साल पुराने शिव शक्ति मंदिर को गिराने के नोटिस पर लगाई रोक

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेताजी नगर क्षेत्र में स्थित 50 साल पुराने शिव शक्ति मंदिर को खाली करने और गिराने के लिए एनबीसीसी द्वारा जारी किए गए नोटिस पर आगामी 23 नवंबर तक रोक लगा दी है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेताजी नगर स्थित 50 साल पुराने शिव शक्ति मंदिर को गिराने के नोटिस पर लगाई रोक

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नई दिल्ली (भारत)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेताजी नगर क्षेत्र में स्थित 50 वर्षीय शिव शक्ति मंदिर को खाली कराने और ध्वस्त करने के लिए एनबीसीसी द्वारा जारी नोटिस पर रोक लगा दी है। एनबीसीसी ने यह नोटिस 1 अक्टूबर को जारी किया था और इसे इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि विध्वंस आदेश पारित होने से पहले याचिकाकर्ता को कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था।

15 अक्टूबर को विध्वंस का आदेश पारित

15 अक्टूबर को विध्वंस का आदेश पारित होने से पहले याचिकाकर्ता को कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था, इस आधार पर विध्वंस नोटिस को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने 13 अक्टूबर को संदीप कुमार भाटिया द्वारा दायर विध्वंस नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। प्रतिवादी अधिकारियों के वकील ने नोटिस स्वीकार कर लिया और निर्देश लेने के लिए समय मांगा। मामले की सुनवाई 23 नवंबर को सूचीबद्ध की गई है। इस बीच, पीठ ने अगली सुनवाई की तारीख तक नोटिस के संचालन पर रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार, खुशबू शर्मा और कार्तिक उपस्थित हुए।

मंदिर पिछले 50 वर्षों से अस्तित्व में

यह निवेदन किया गया कि मंदिर पिछले 50 वर्षों से अस्तित्व में है और 1 अक्टूबर को इसे ध्वस्त करने का नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया और याचिकाकर्ता को जवाब देने का अवसर नहीं दिया गया। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि नोटिस में सक्षम धार्मिक समिति के निर्णय या अनुमोदन का उल्लेख नहीं किया गया है, यदि लागू कानून या नीति के तहत ऐसे अनुमोदन की आवश्यकता थी। इसमें आगे कहा गया है कि नोटिस पर सक्षम प्राधिकारी के हस्ताक्षर और मुहर नहीं है।

मंदिर में महंत मोती राम का समाधि स्थल भी

याचिकाकर्ता मंदिर के पुजारी हैं, जो 50 वर्ष से अधिक पुराना बताया जाता है और आरती, पूजा और कीर्तन सहित नियमित पूजा का स्थल रहा है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता के दादा, महंत मोती राम, मंदिर के पुजारी थे, उसके बाद याचिकाकर्ता के पिता, स्वर्गीय कुलदीप चंद्र, पुजारी बने। अपने पिता के निधन के बाद, याचिकाकर्ता मंदिर की देखभाल कर रहे हैं। मंदिर में देवी दुर्गा, भगवान शिव, भगवान हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं, साथ ही महंत मोती राम का समाधि स्थल भी है।

प्रस्तावित विध्वंस से श्रद्धालुओं की धार्मिक प्रथाओं में बाधा

यह तर्क दिया गया कि नवरात्रि के दौरान प्रस्तावित विध्वंस से श्रद्धालुओं की धार्मिक प्रथाओं में बाधा उत्पन्न होगी और मंदिर, उसकी मूर्तियों और समाधि स्थल को गंभीर और अपरिवर्तनीय क्षति पहुंचेगी। याचिकाकर्ता किसी भी कानूनी कार्रवाई में बाधा नहीं डालना चाहता, बल्कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने दस्तावेज और आपत्तियां प्रस्तुत करने का उचित अवसर चाहता है।

(इनपुट: ANI)

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