दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने कथित प्रशासनिक दबाव और मेडिकल लीव न मिलने से परेशान होकर आत्महत्या का प्रयास किया।
Delhi Teacher Attempts Suicide Over Alleged Work Pressure and Denial of Medical Leave |
दिल्ली। के एक सरकारी सर्वोदय विद्यालय में कार्यरत 45 वर्षीय गणित शिक्षक ने कथित तौर पर प्रशासनिक दबाव और मानसिक प्रताड़ना के चलते खुदकुशी करने की कोशिश की। यह घटना बुधवार (8 जुलाई) दोपहर को रानी झांसी फ्लाईओवर पर हुई, जहाँ से उन्होंने छलांग लगा दी।
घटना और स्वास्थ्य की स्थिति
शास्त्री नगर निवासी आनंद कुमार सरोहा (45 वर्ष), जो सर्वोदय विद्यालय में गणित के समर्पित शिक्षक हैं। पुलिस और परिजनों के अनुसार, फ्लाईओवर से कूदने से पहले उन्होंने हताशा में डेटॉल भी पी लिया था।
हिंदू राव अस्पताल में भर्ती
घटना के तुरंत बाद उन्हें हिंदू राव अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से बेहतर इलाज के लिए उन्हें सेंट स्टीफंस अस्पताल रेफर किया गया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है, लेकिन दोनों हाथों में फ्रैक्चर और गंभीर चोटों के कारण उनकी सर्जरी की जानी है।
बीमारी में भी छुट्टी से इनकार
शिक्षक के परिवार और उनके साले विक्रम सिंह तोमर ने स्कूल व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। आनंद कुमार सरोहा अस्थमा (दमा) के मरीज हैं। खराब स्वास्थ्य के कारण वे पिछले कुछ समय से 10 दिनों के चिकित्सा अवकाश (Medical Leave) की मांग कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने उनके आवेदन को बार-बार खारिज कर दिया।
चुनावी और जनगणना ड्यूटी का दबाव
वे सदर बाजार के बूथ नंबर 141-150 तक मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा (SIR) के लिए बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) के पर्यवेक्षक (Supervisor) के रूप में तैनात थे। खराब तबीयत के बावजूद उन पर जनगणना और चुनावी कार्य को जल्द पूरा करने का अत्यधिक प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा था। परिवार का कहना है कि उन्हें मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया गया कि अत्यधिक तनाव में आकर उन्हें आत्महत्या ही एकमात्र रास्ता नजर आया।
पुलिस जांच और जवाबदेही की मांग
बड़ा हिंदू राव पुलिस स्टेशन को 8 जुलाई की शाम 4:33 बजे इस घटना की सूचना मिली थी, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से इस पूरी त्रासदी की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करने का आग्रह किया है। उनकी मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में काम के दबाव और उत्पीड़न के कारण किसी अन्य सरकारी कर्मचारी को ऐसा खौफनाक कदम न उठाना पड़े। (एएनआई)
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