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JPSC-JSSC आंदोलन के बीच महतो का आरोप

तिरंगा यात्रा से रोके जाने पर देवेंद्र महतो ने किया सवाल, 'कहा क्या यही है आजादी'

झारखंड के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस पर रांची के सदर अस्पताल से तिरंगा यात्रा में शामिल होने निकलने के दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया और उनके साथ धक्का-मुक्की की।

तिरंगा यात्रा से रोके जाने पर देवेंद्र महतो ने किया सवाल कहा क्या यही है आजादी

Devendra Mahto Raised Question (ANI Photo) |

रांची: झारखंड के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने रविवार को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पुलिस पर बर्बरता और मारपीट का आरोप लगाया। रोजगार सुधारों और भर्ती में पारदर्शिता की मांग को लेकर राज्य के युवा आंदोलन में अग्रणी रहे महतो ने कहा कि सुरक्षा बलों ने उन्हें नियोजित तिरंगा मार्च सहित शांतिपूर्ण देशभक्ति कार्यक्रमों में भाग लेने से रोका।

'उन्हें रोका गया, धक्का-मुक्की की गई'

महतो के अनुसार, भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छात्र प्रदर्शनकारियों द्वारा आयोजित तिरंगा मार्च में भाग लेने के लिए रांची के सदर अस्पताल से निकलने की कोशिश करते समय पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन रोका। एक पोस्ट में महतो ने आरोप लगाया कि अस्पताल में इलाज के बावजूद उन्हें रोका गया, धक्का-मुक्की की गई और उनके कुछ साथियों की पिटाई भी की गई। उन्होंने कहा कि उन्हें ध्वजारोहण कार्यक्रम और तिरंगा मार्च में भाग लेने से रोका गया। 

महतो ने कहा क्या यही है स्वतंत्र भारत?

महतो ने कहा, स्वतंत्रता दिवस पर भी अस्पताल में इलाज के बावजूद, मुझे जबरन रोका गया, धक्का-मुक्की की गई और मेरे साथियों की भी पिटाई की गई। महतो ने सवाल उठाया कि क्या भारत के स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा संघर्ष की गई स्वतंत्रता में नागरिकों का शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाने और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अधिकार भी शामिल है? उन्होंने कहा, आज का सवाल यह है कि क्या यही वो स्वतंत्रता है जिसके लिए भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, महात्मा गांधी और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संघर्ष किया?" 

महतो ने आगे सवाल करते हुआ कहा...

उन्होंने आगे पूछा कि क्या लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और शांतिपूर्ण तिरंगा मार्च में भाग लेने की स्वतंत्रता से वंचित कर दिया गया है? इसके साथ ही कहा कि क्या अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और शांतिपूर्ण तिरंगा मार्च में भाग लेने की स्वतंत्रता भी छीन ली गई है? उन्होंने इस दिन को "बेहद दर्दनाक" बताया। यह घटना झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में चल रहे छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि में घटी।

हजारों छात्र और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार इस आंदोलन में ले रहे भाग

हजारों छात्र और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार इस आंदोलन में भाग ले रहे हैं, जिसका केंद्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के आसपास है। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता, कथित तौर पर धांधली वाली परीक्षाओं को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई जांच या झारखंड के बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल द्वारा जांच की मांग की है।

2 अगस्त को शुरू की थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

इस महीने की शुरुआत में छात्रों के झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करने के बाद आंदोलन और तेज हो गया। प्रदर्शन तनावपूर्ण हो गया, जिसके चलते पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। खबरों के अनुसार, झड़प के दौरान कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए। इस घटना के बाद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे महतो को रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। महतो ने 2 अगस्त को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी और स्वतंत्रता दिवस तिरंगा यात्रा में भाग लेने के प्रयास के दौरान उनका 14वां दिन था। 

लंबे समय से चल रहे अनशन के कारण उनकी सेहत बनी चिंता का विषय

लंबे समय से चल रहे अनशन के कारण उनकी सेहत चिंता का विषय बन गई थी। खबरों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वतंत्रता दिवस पर प्रदर्शनकारी छात्रों ने फिर भी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा का आयोजन किया। प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय ध्वज उठाया, "भारत माता की जय" और "वंदे मातरम" जैसे देशभक्ति के नारे लगाए। यह मार्च व्यापक छात्र आंदोलन का 22वां दिन था।

महतो और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प 

सदर अस्पताल से मिले दृश्यों में महतो और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प भी हुई, जब उन्होंने अस्पताल से निकलने का प्रयास किया। कई समाचार संगठनों द्वारा प्रसारित फुटेज में महतो को तिरंगा लिए और तिरंगे से सजे कपड़े पहने देखा गया, जबकि पुलिसकर्मियों ने उन्हें परिसर छोड़ने से रोक दिया। महतो के आरोपों ने स्वतंत्रता दिवस पर उनके खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। जहां उनके समर्थकों ने सवाल उठाया है कि उन्हें शांतिपूर्ण राष्ट्रीय उत्सव में शामिल होने से क्यों रोका गया, वहीं अन्य लोगों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता की ओर इशारा किया है। 

महतो को अस्पताल से बाहर जाने से रोकने के फैसले का बचाव करते हुए दिया गया तर्क

झारखंड कांग्रेस नेता कुमार राजा ने महतो को अस्पताल से बाहर जाने से रोकने के फैसले का बचाव करते हुए तर्क दिया कि उनके स्वास्थ्य को राजनीतिक विचारों से ऊपर रखा जाना चाहिए। लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन ने भी राजनीतिक ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि प्रदर्शनकारी राज्य की भर्ती प्रणाली में जवाबदेही और सुधारों की मांग जारी रखे हुए हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है और छात्रों से सुझाव और चिंताओं को जानने के लिए 'छात्रों की बात- छात्रों के साथ' नामक एक कार्यक्रम शुरू किया है।

महतो ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों से जोड़ा

हालांकि, महतो के लिए स्वतंत्रता दिवस की घटना व्यापक आंदोलन का विस्तार बन गई है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों से जोड़ा और कहा कि तिरंगा यात्रा में भाग लेने से रोके जाने पर उन्हें गहरा दुख हुआ है। महतो द्वारा धक्का दिए जाने और उनके साथियों की पिटाई किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी। अस्पताल में हुई घटना के संबंध में पुलिस का बयान तत्काल उपलब्ध नहीं था। 

(इनपुट: ANI)

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