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5 करोड़ के कथित भुगतान पर उठे सवाल

विराट कोहली-प्रेमानंद महाराज से जुड़े 5 करोड़ के दावे पर धर्म रक्षा संघ का पलटवार

धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े पांच करोड़ रुपये के कथित भुगतान के दावे को लेकर बयान जारी किया।

विराट कोहली-प्रेमानंद महाराज से जुड़े 5 करोड़ के दावे पर धर्म रक्षा संघ का पलटवार

5 करोड़ के कथित भुगतान पर उठे सवाल |

मथुरा: धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि वृंदावन के पूज्य संत प्रेमानंद जी महाराज के संबंध में यह आरोप लगाया जाना कि भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को पांच करोड़ रुपये देकर महाराज के प्रचार के लिए बुलाया गया था। अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर विषय है। धर्म रक्षा संघ ऐसे अप्रमाणित आरोपों का स्पष्ट शब्दों में विरोध करता है। 

पांच करोड़ के दावे को बताया निराधार

उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के पास पांच करोड़ रुपये के कथित लेन-देन का कोई ठोस प्रमाण, बैंक रिकॉर्ड, अनुबंध और अन्य विश्वसनीय साक्ष्य हैं, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए और सक्षम जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। बिना प्रमाण के किसी संत की प्रतिष्ठा को इस प्रकार के आरोपों से जोड़ना उचित नहीं है, जबकि इस प्रकरण में खुद विराट कोहली के प्रतिनिधि की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि पांच करोड़ रुपये दिए जाने का दावा झूठा और निराधार है। विराट कोहली पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के प्रति अपनी व्यक्तिगत श्रद्धा और आस्था के कारण उनके दर्शन के लिए जाते हैं।

संत की प्रतिष्ठा और ब्रज की संत परंपरा की गरिमा बचाने की अपील

उन्होंने आगे कहा कि पूज्य प्रेमानंद जी महाराज की पहचान किसी क्रिकेटर, अभिनेता और प्रसिद्ध व्यक्ति के आगमन से नहीं बनी है। उनकी पहचान उनकी साधना, सरलता, भक्ति और श्रीराधा नाम के प्रति उनके समर्पण से बनी है। देश-विदेश से असंख्य श्रद्धालु उनके सत्संग और दर्शन के लिए वृंदावन आते हैं। सनसनी फैलाने वाले अप्रमाणित आरोप न केवल संबंधित संत की प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं, बल्कि ब्रज और वृन्दावन की संत परंपरा की गरिमा को भी ठेस पहुंचाते हैं। धर्म रक्षा संघ पूज्य प्रेमानंद जी महाराज सहित ब्रज के संतों की गरिमा और सम्मान के पक्ष में दृढ़ता से खड़ा है। साथ ही हम चाहते हैं कि किसी भी गंभीर आरोप की चर्चा तथ्यों, प्रमाणों और मर्यादा के आधार पर ही हो। 

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