डिंडौरी। मध्य प्रदेश का आदिवासी बहुल डिंडौरी जिला इन दिनों देश में जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़े रोल मॉडल के रूप में उभरा है...
जल संरक्षण में डिंडौरी देश में दूसरे नंबर पर, जनभागीदारी से बनी 6 लाख से अधिक जल संरचनाएं |
डिंडौरी। मध्य प्रदेश का आदिवासी बहुल डिंडौरी जिला इन दिनों देश में जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़े रोल मॉडल के रूप में उभरा है। गंभीर जल संकट और भीषण गर्मी की चुनौतियों के बीच, डिंडौरी जिले ने जल संरचनाओं के निर्माण और पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार (पुनरुद्धार) के मामले में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया है।
जनभागीदारी बना आंदोलन
यह ऐतिहासिक सफलता किसी सरकारी औपचारिकता से नहीं, बल्कि व्यापक जनभागीदारी (कम्युनिटी मूवमेंट) की वजह से संभव हो पाई है। पिछले दो महीनों से जिले के ग्रामीण और स्थानीय निवासी लगातार श्रमदान और सहयोग के जरिए जल संकट से निपटने के लिए काम कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों के लोगों का कहना है कि पानी को रोकने और सहेजने से ही आने वाले समय में पानी बचेगा और क्षेत्र का भूजल स्तर (Groundwater Level) सुधरेगा।
अब तक 6 लाख से अधिक संरचनाओं का निर्माण
प्रशासनिक आंकड़ों और जमीनी स्तर पर हुए कार्यों के अनुसार, अब तक जिले और विभिन्न जनपद पंचायत क्षेत्रों में रिकॉर्ड 6 लाख 26 हजार 955 जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा चुका है।
इन जल संरचनाओं में शामिल हैं
सोख गड्ढे (Soak Pits) का निर्माण। घरों और हैंडपंपों के पास बहने वाले व्यर्थ पानी को रोकने के लिए। रीचार्ज पिट और फार्म पोंड बनाए गये हैं। वर्षा जल को सीधे धरती के भीतर भेजने और खेतों में पानी रोकने के लिए खेत-तालाबों का निर्माण किया गया है। पारंपरिक स्रोतों का पुनरुद्धार किया गया है। पुराने कुओं, बावडियों और तालाबों की सफाई व मरम्मत की गई है।
ग्रामीणों का संदेश
"पानी की एक-एक बूंद कीमती है। अगर हम आज पानी रोकने के प्रयास नहीं करेंगे, तो कल हमारे गांवों में जल संकट और गहरा जाएगा। यह अभियान हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए है।" पहाड़ी और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्र होने के बावजूद, डिंडौरी के नागरिकों और प्रशासन ने मिलकर जल संवर्धन की दिशा में देश के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है।
यह भी पढ़ें : https://www.primenewsnetwork.in/india/nppa-fixes-retail-prices-for-30-essential-medicine-formulations/209979