बलरामपुर क्षेत्र में कुल्फी और आइसक्रीम बेचने वाले कारोबारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां काजू शेक, फालूदा और कुल्फी भारी गंदगी और अस्वच्छ माहौल के बीच बनाए जा रहे हैं।
बलरामपुर (छत्तीसगढ़)। बलरामपुर क्षेत्र में कुल्फी और आइसक्रीम बेचने वाले कारोबारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिन काजू शेक, फालूदा और कुल्फी को लोग स्वाद और ठंडक के लिए खरीद रहे हैं, वे भारी गंदगी और अस्वच्छ माहौल के बीच तैयार किए जा रहे हैं। सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जहां खाद्य पदार्थ बनाए जा रहे हैं, वहां चारों तरफ गंदगी फैली हुई है। गंदे ड्रम, बदबूदार पानी, खुले में रखी सामग्री और अस्वच्छ बर्तनों के बीच खाद्य पदार्थ तैयार किए जा रहे हैं।
दुकानदार नहीं रख रहे स्वच्छता
स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकानदार बिना किसी स्वच्छता नियम का पालन किए खुलेआम कारोबार चला रहे हैं। गर्मी के मौसम में कुल्फी, आइसक्रीम और फालूदा की मांग बढ़ने के साथ ही लोग बड़ी संख्या में इन चीजों का सेवन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं है कि जो चीजें वे खा रहे हैं, वे किन हालात में तैयार हो रही हैं।

लोगों की सेहत से हो रहा सीधा खिलवाड़
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि दुकानदार केवल मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। कई जगहों पर दूध और अन्य सामग्री खुले में रखी जा रही है, जिस पर मक्खियां भिनभिना रही हैं। वहीं गंदे पानी और खराब सफाई के बीच शेक और फालूदा तैयार किया जा रहा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि छोटे बच्चे और युवा इन खाद्य पदार्थों का सबसे ज्यादा सेवन करते हैं। ऐसे में गंदगी में तैयार हो रहे खाद्य पदार्थ उनके स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि नियमित जांच और निरीक्षण होता, तो इस तरह खुलेआम गंदगी के बीच खाद्य पदार्थ तैयार नहीं किए जाते। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण ही ऐसे कारोबारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर बिना साफ-सफाई और मानकों के ऐसे कारोबार कैसे संचालित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गंदगी में तैयार खाद्य पदार्थ लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। दूषित दूध, गंदा पानी और अस्वच्छ बर्तनों में बने खाद्य पदार्थों से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो जाते हैं। यदि इन्हें साफ-सफाई के बिना तैयार किया जाए तो बैक्टीरिया और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों ने प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की है कि ऐसे दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही खाद्य पदार्थ बनाने की जगहों की जांच कर दोषियों पर जुर्माना लगाने और उनके लाइसेंस रद्द करने की भी मांग उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो लोगों की सेहत के साथ ऐसा खिलवाड़ लगातार जारी रहेगा। लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि बाजार और ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य पदार्थ बेचने वालों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए ताकि आम जनता को सुरक्षित और स्वच्छ खाद्य पदार्थ मिल सकें।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। सामने आई तस्वीरों ने लोगों को हैरान कर दिया है। अब सभी की नजर प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कब तक कार्रवाई करते हैं या फिर लोगों की सेहत के साथ ऐसा ही खिलवाड़ चलता रहेगा।
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