दुर्लभ बीमारी ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) से पीड़ित 16 वर्षीय गर्वित रेवाड़ को एक दिन के लिए सांकेतिक जिला कलेक्टर बनाया गया।
डीडवाना-कुचामन (राजस्थान)। कहते हैं कि सपने देखने वालों की हार नहीं होती और जब प्रशासन संवेदनशील हो तो सपनों को सच होने में देर नहीं लगती। डीडवाना-कुचामन जिले में बुधवार को ऐसा ही एक प्रेरणादायक और भावुक दृश्य देखने को मिला, जब दुर्लभ बीमारी ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) से पीड़ित 16 वर्षीय गर्वित रेवाड़ को एक दिन के लिए सांकेतिक जिला कलेक्टर बनाया गया।

बचपन से ही मेधावी रहे हैं गर्वित
जिले के रोडू निवासी गर्वित रेवाड़ बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं। हाल ही में उन्होंने दसवीं कक्षा में 83 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। उनके पिता आरएएस प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, जिससे घर में हमेशा शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं का माहौल रहा। इसी वातावरण ने गर्वित के मन में आईएएस अधिकारी बनकर जिला कलेक्टर बनने का सपना जगाया।

ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित हैं गर्वित
हालांकि कुछ समय पहले गर्वित को ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) जैसी दुर्लभ बीमारी होने का पता चला। बीमारी ने परिवार के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दीं, लेकिन माता-पिता ने हार नहीं मानी और बेटे के सपनों को जिंदा रखा। गर्वित ने बताया कि उनका सपना हमेशा जिला कलेक्टर बनने का रहा है। जब उन्हें एक दिन के लिए जिला कलेक्टर बनने का अवसर मिला तो यह उनके लिए किसी बड़े सम्मान और उपलब्धि से कम नहीं था।

एक दिन का कलेक्टर बनने पर हुआ स्वागत
गर्वित के माता-पिता ने डीडवाना-कुचामन जिला कलेक्टर अवधेश मीणा से मुलाकात कर बेटे की बीमारी और उसके सपने के बारे में जानकारी दी। गर्वित की कहानी सुनकर जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने संवेदनशील पहल करते हुए उसे एक दिन का सांकेतिक जिला कलेक्टर बनाने का निर्णय लिया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गर्वित जिला कलेक्टर की गाड़ी में कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्हें जिला कलेक्टर की कुर्सी पर बैठाकर सांकेतिक रूप से पदभार ग्रहण कराया गया।

बैठक में लिया भाग, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
इसके बाद उन्होंने कार्यालय कार्मिकों की बैठक ली, जनसुनवाई की और फरियादियों की समस्याएं सुनकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। जिला कलेक्टर अवधेश मीणा ने कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर उसे हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा कि गर्वित जैसे बच्चों का हौसला समाज के लिए प्रेरणा है और उनके सपनों को सम्मान देना हम सभी की जिम्मेदारी है।

बेटे को कलेक्टर की कुर्सी पर देखकर छलक पड़े माता-पिता के आंसू
अपने बेटे को जिला कलेक्टर की कुर्सी पर बैठा देखकर गर्वित के माता-पिता की आंखें खुशी से नम हो गईं। पिता हरलाल रेवाड़ ने बताया कि जब उन्हें बेटे की बीमारी का पता चला तो परिवार के लिए वह बेहद कठिन समय था, लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। उनका हमेशा प्रयास रहा कि गर्वित के सपनों को टूटने न दिया जाए। उन्होंने जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उनके बेटे के चेहरे पर जो खुशी दिखाई दे रही है। वह उनके लिए जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार है। वहीं गर्वित की माता सुनीता रेवाड़ ने भावुक होते हुए कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों के सपनों को पूरा होते देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर अवधेश मीणा की संवेदनशील पहल ने उनके बेटे की वर्षों पुरानी इच्छा पूरी कर दी, जिसे परिवार कभी नहीं भूल पाएगा।

उम्मीद, संघर्ष और संवेदनशीलता की मिसाल
एक ओर दुर्लभ बीमारी से संघर्ष करता एक बेटा, दूसरी ओर उसके सपनों को टूटने नहीं देने वाले माता-पिता और तीसरी ओर संवेदनशील प्रशासन। इन तीनों ने मिलकर एक ऐसी कहानी लिखी, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। एक दिन के जिला कलेक्टर बने गर्वित रेवाड़ ने यह संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि हौसला बुलंद हो तो सपनों को जीया जा सकता है। डीडवाना-कुचामन में साकार हुआ यह सपना केवल गर्वित की कहानी नहीं, बल्कि उम्मीद, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।
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