चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में शंतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए डीएम और एसपी के प्रति काफी सख्त है।
कोलकाता। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के कार्य में लगाए गए सभी डीएम, एएसपी और दूसरे अधिकारियों को मुख्य चुनाव अधिकारी के मार्फत साफ-साफ संकेत दे दिया है कि उसकी ओर से दिए गए निर्देशों की तनिक भी अवहेलना करने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनकी सेवा को खत्म तक किया जा सकता है। चुनाव के बाद भी चुनाव आयोग की मंजूरी बिना राज्य सरकार उन्हें राहत नहीं दे सकेगी। वोटरों को किसी भी डराने-धमकाने की घटना के लिए डीएम और एसपी ही जिम्मेदार होंगे।
अधिकारियों पर बढ़ा दबाव, कानून-व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती
सूत्रों के अनुसार राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने चुनाव कार्य में लगे सभी अधिकारियों के साथ हुई वर्चुअल बैठक में चुनाव आयोग के रुख से अवगत करा दिया है और इससे अधिकारियों की चुनाव आयोग को संतुष्ट करने की चिंता और गतिविधियां दोनों बढ़ी है। सबसे अधिक कानून व्यवस्था को बनाए रखने की समस्या है। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग का शुरू से ही जोर दिया जा रहा है, हाई कोर्ट और राज्यपाल की ओर से भी गौर किया जा रहा है।
चरणबद्ध तरीके से भारी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती
सूत्रों के अनुसार राज्य में 10 मार्च तक केंद्रीय बल की 480 कंपनी आ चुकी है और विभिन्न जिलों में तैनात भी कर दी गई है। केंद्रीय बल की 300 कंपनी 31 मार्च तक, फिर 300 कंपनी 7 अप्रैल तक, भिर 300 कंपनी 10 अप्रैल तक, 277 कंपनी 13 अप्रैल तक और 743 कंपनी 17 अप्रैल तकक आ जाएंगी। इन कंपनियों में बिहार, उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों की सशस्त्र बल भी शामिल हैं।
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